बरेली : दरगाह शाह शराफ़त अली मियां रहमतुल्लाह अलैह पर 58वां सालाना उर्स-ए-शराफ़ती का आज (सोमवार) जुलूस-ए-परचम कुशाई के साथ आगाज हो गया। इसके साथ ही माह-ए-ईद मिलादुन्नबी के इस्तक़बाल में दरगाह शरीफ़ से निकले इस जुलूस में हज़ारों अकीदतमंदों ने मोहब्बत और अमन का पैग़ाम दिया। सुबह 11 बजे ख़ानक़ाह शरीफ़ के मेहमानखाने में प्रोग्राम का आग़ाज़ तिलावत -ए- क़ुरआन से हुआ। इसकी निज़ामत मुख़्तार तिलहरी ने की। प्रो. महमूद-उल-हसन ने तक़रीर में कहा “इस बार हमारे आका का 1500वां सालाना जश्न-ए-विलादत है। हमें इसे मोहब्बत और इत्तिहाद के साथ मनाना चाहिए। हमारे किसी अमल से इंसानियत को तकलीफ़ न पहुंचे।”
हज़रत शाह शराफ़त अली मियां की बुज़ुर्गी और फ़ैज़ान पर डाली रोशनी
देखें वीडियो 👇🏻
https://youtu.be/_L_3pgTT_uI?si=ygu1Cs5fl7QtdBkM
हज़रत मुफ़्ती फ़हीम अज़हरी सकलैनी ने साहिबे उर्स हज़रत शाह शराफ़त अली मियां की बुज़ुर्गी और फ़ैज़ान पर रोशनी डाली। प्रोग्राम की सरपरस्ती साहिबे सज्जादा शाह मोहम्मद ग़ाज़ी मियां सकलैनी ने की। नमाज़-ए-ज़ुहर और फ़ातिहा के बाद 2:30 बजे जुलूस-ए-परचम रवाना हुआ। 58 वें उर्स-ए-शराफ़ती अमन, इत्तिहाद और इंसानियत के पैग़ाम के साथ शुरू हुआ। 1500वें सालाना जश्न-ए-विलादत की तैयारियों को देखते हुए आने वाले दिनों में दरगाह शरीफ़ पर और भी बड़े प्रोग्राम होंगे।
जुलूस-ए-परचम का फूलों से जगह- जगह स्वागत
जुलूस दरगाह शरीफ़ से शुरू होकर कच्ची मस्जिद, ब्रहमपुरा, दिलशाद बज़ार, दीवानखाना चौक, कोहाड़ा पीर चौराहा, नैनीताल रोड, क़ुतुबख़ाना, मनिहारान गली होते हुए वापस दरगाह पहुँचा। रास्ते भर फूलों की बारिश: शाहबाद में फ़ैज़ाने शाह सकलैन फ़ाउंडेशन, कलाकेंद्र स्कूल के पास अरोड़ा और सक्सेना परिवार, भूड़ में डॉ. राम किशोर ने पुष्प वर्षा की। छतों और दुकानों से गुलपोशी कर हर मोड़ पर मोहब्बत और अकीदत का शानदार नज़ारा।
शहर में सबीलों का इंतज़ाम
अकीदतमंदों के लिए खाने-पीने का बेहतरीन इंतज़ाम किए गए थे। कोहाड़ापीर चौराहा से घोसी बिरादरी की तरफ़ से 50 कुंटल दूध की सबील। पानी, शरबत, मिठाई की सबील, रास्ते भर पीर भाइयों की दुकानों पर इंतजाम किए गए थे। जुलूस में नबीरा-ए-मियां हज़रत सादक़ैन मियां सकलैनी और हाफ़िज़ गुलाम ग़ौस सकलैनी ने क़ियादत की। पुलिस, प्रशासन और नगर निगम ने मिलकर व्यवस्था को सफल बनाया।
यह उलमा शामिल
जुलूस में मौलाना रिफ़ाक़त नईमी, मौलाना मुख़्तार सकलैनी, मुफ़्ती फ़हीम अहमद, मौलाना अनवार, हाफ़िज़ गौसी, हाफ़िज़ जाने आलम, मोहम्मद हमज़ा, गुलाम मुर्तुज़ा, फैजयाब, मुंतासिब, मुनीफ़, हाजी लतीफ़, इंतिज़ार, मेराज, असदक़, नज़ीफ़, हमूद सकलैनी आदि। जुलूस की व्यवस्था में आफ़ताब सकलैनी, अबरार हुसैन, सय्यद राशिद, जमील, आमिर, फ़ैसल, मोहसिन, तनवीर, निज़ाम, मुशाहिद, अब्बास, खुर्रम, आरिफ़, शावेज़, यावर, रिज़वान सकलैनी आदि शामिल रहे।
