शासन स्तर से मिली मंजूरी के बाद अस्पताल को पूरी क्षमता से संचालित करने की तैयारी, करीब 700 मरीज पहुंच रहे ओपीडी में, विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की तैनाती से बढ़ेंगी इलाज की सुविधाएं
बरेली : शहर के 300 बेड अस्पताल को पूरी क्षमता से संचालित करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। लंबे समय से सीमित संसाधनों के साथ चल रहे इस अस्पताल को पब्लिक -प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मोड पर संचालित करने की शासन स्तर से मंजूरी मिलने की जानकारी सामने आई है। इससे बरेली के साथ आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, अस्पताल में नई सेवाएं कब से शुरू होंगी और संचालन की विस्तृत व्यवस्था क्या होगी, इसे लेकर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। अस्पताल में वेंटिलेटर,ऑक्सीजन युक्त बेड, हाई फ्लो नेजल कैनुला(HFNC), बाईपैप,पीकू,डिलीवरी और ऑपरेशन थिएटर से जुड़े उपकरण उपलब्ध बताए गए हैं। इसके अलावा ऑक्सीजन प्लांट, जनरेटर और अग्निशमन संसाधन भी मौजूद हैं। अस्पताल का संचालन पूरी क्षमता से शुरू होने पर इन संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दूसरे अस्पतालों पर निर्भर रहने की जरूरत कम हो सकती है।
रोजाना 700 मरीज पहुंच रहे, लेकिन विशेषज्ञ इलाज के लिए जाना पड़ता है दूसरे अस्पताल
निर्माण के बाद वर्ष 2022 से यहां जिला अस्पताल के एक हिस्से के रूप में ओपीडी शुरू की गई थी। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. इंतजार हुसैन के मुताबिक, फिलहाल अस्पताल में पदों का सृजन नहीं हुआ है। यहां नेत्र और दंत चिकित्सा सेवाओं के साथ एआरवी, सीटी स्कैन और पैथोलॉजी की सुविधा उपलब्ध है। जनरल ओपीडी में दो चिकित्सक मरीजों को परामर्श देते हैं। प्रतिदिन करीब 700 मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। हालांकि, सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग और बाल रोग जैसी विशेषज्ञ सेवाओं के लिए मरीजों को महाराणा प्रताप जिला संयुक्त चिकित्सालय जाना पड़ता है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त कर्मचारियों की तैनाती होने से मरीजों को एक ही परिसर में अधिक सेवाएं मिलने की संभावना है।
ट्रॉमा सेंटर शुरू होने से गंभीर घायलों को मिल सकती है राहत
बरेली आसपास के कई जिलों के लिए प्रमुख चिकित्सा केंद्र है। सड़क दुर्घटनाओं और अन्य हादसों में गंभीर रूप से घायल मरीजों को बेहतर उपचार के लिए कई बार लखनऊ या दिल्ली रेफर करना पड़ता है। लंबी दूरी तय करने में लगने वाला समय मरीजों के लिए जोखिम बढ़ा सकता है।इसी को देखते हुए 300 बेड अस्पताल को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने और ट्रॉमा सेंटर के रूप में विकसित करने की मांग कई बार उठाई जा चुकी है। यदि यहां ट्रॉमा सेंटर और संबंधित आपातकालीन सेवाएं शुरू होती हैं, तो गंभीर मरीजों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ट्रॉमा सेंटर के संचालन की तारीख और सेवाओं की उपलब्धता की अभी पुष्टि जरूरी है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की लंबे समय से जरूरत
अस्पताल को पूरी क्षमता से चलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को मानव संसाधन की मांग भेजे जाने की जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें नेत्र सर्जन, बाल रोग विशेषज्ञ, रेडियोलॉजिस्ट, चेस्ट फिजिशियन, स्त्री रोग विशेषज्ञ, न्यूरो सर्जन, यूरो सर्जन, न्यूरो फिजिशियन, नेफ्रोलॉजिस्ट और हृदय रोग विशेषज्ञों समेत कई श्रेणियों के चिकित्सकों की मांग शामिल है। इसके अलावा फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, ईसीजी टेक्नीशियन, फिजियोथेरेपिस्ट और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की जरूरत भी बताई गई है। इन पदों पर तैनाती और अस्पताल के संचालन की शर्तें तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मरीजों को किन-किन विशेषज्ञ सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
उपकरणों की सुरक्षा भी रही चुनौती
अस्पताल का पूर्ण संचालन नहीं होने के कारण परिसर में रखे कई उपकरणों और अन्य सामान के उपयोग पर सवाल उठते रहे हैं। खबर के मुताबिक, यहां बने आवासों और ओपीडी परिसर से कुर्सियां, पंखे, टोंटियां और एसी की वायरिंग जैसी चीजें चोरी होने की घटनाएं भी सामने आई थीं। इसके बाद सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत महसूस की गई। अब अस्पताल को PPP मोड पर चलाने की मंजूरी के बाद उम्मीद है कि उपलब्ध संसाधनों का व्यवस्थित उपयोग होगा और सुरक्षा व रखरखाव की व्यवस्था भी बेहतर बनाई जा सकेगी।
मेडिकल कॉलेज बनाने की संभावना पर भी चर्चा
स्वास्थ्य विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में अस्पताल के संसाधनों को पर्याप्त, लेकिन मेडिकल कॉलेज के लिए उपलब्ध जमीन को सीमित बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए अस्पताल के अलावा अकादमिक ब्लॉक, सभागार और अन्य प्रशासनिक भवनों की भी जरूरत होती है। ऐसे में मौजूदा परिसर में मेडिकल कॉलेज की संभावना पर जमीन की उपलब्धता के आधार पर ही निर्णय हो सकेगा। सबसे अहम सवाल यह है कि PPP मोड पर संचालन की मंजूरी के बाद अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती, आधुनिक चिकित्सा सेवाओं और ट्रॉमा सेंटर को शुरू करने की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है। यदि ये सुविधाएं धरातल पर उतरती हैं, तो बरेली और आसपास के जिलों के मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने में 300 बेड अस्पताल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
