बरेली: जिले में औद्योगिक विस्तार को नई दिशा देने के प्रयास तेज हो गए हैं। दिसंबर में होने वाली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (GBC) 5.0 के लिए बरेली को 15,000 करोड़ रुपये के निवेश लक्ष्य का भार सौंपा गया है। इसे पूरा करने के लिए कुल 21 विभागों को स्पष्ट जिम्मेदारियां दी गई हैं।
2,500 करोड़ के करार पूर्ण, इतने ही प्रस्ताव मंजूरी के चरण में
जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के मुताबिक, अब तक 2,500 करोड़ रुपये के निवेश करार फाइनल किए जा चुके हैं। लगभग इतनी ही राशि के प्रस्ताव विभिन्न प्रक्रियाओं में आगे बढ़ रहे हैं। उद्योग विभाग लगातार उद्यमियों से चर्चा कर उन्हें उपलब्ध योजनाओं और निवेश लाभों की जानकारी दे रहा है। इस बार पुराने उद्योग, नए प्रस्ताव और विस्तार योजनाओं-तीनों को सूचीबद्ध करके आगे बढ़ाया जा रहा है।
GBC 4.0 में मिला था ऐतिहासिक निवेश
पिछले चरण GBC 4.0 में बरेली को 30,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 35,101 करोड़ रुपये के निवेश समझौते मिले थे। इनमें से 190 परियोजनाएं शुरू हो चुकी हैं, जबकि शेष उद्योगों पर इन्वेस्ट मित्र टीम लगातार फॉलो-अप कर रही है।
मुख्य निवेश करार-बरेली में विकसित हो रहा औद्योगिक ढांचा
त्रिवटीनाथ चीनी मिल 150 करोड़ रुपये की लागत वाली कार्यशील परियोजना है। डालमिया शुगर 800 करोड़ रुपये का नया चीनी संयंत्र बना रही है। ओमेक्स सिटी 1,000 करोड़ रुपये के आवासीय प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ा चुका है। वहीं वाडीलाल 500 करोड़ रुपये की आइसक्रीम यूनिट स्थापित करने के करार पर आगे काम कर रहा है।
BDA और UPCIDA को 4,000-4,000 करोड़ का लक्ष्य
बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) और यूपीसीडा को 4,000–4,000 करोड़ रुपये जुटाने की जिम्मेदारी मिली है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि बीडीए पिछले दो वर्षों में पास हुए नक्शों वाले प्रोजेक्टों को इन्वेस्ट UP पोर्टल पर दर्ज कराए। हाल ही में 871 करोड़ की 28 योजनाओं के नक्शे स्वीकृत किए गए हैं। टाउनशिप नीति के तहत दो बड़े बिल्डरों ने भी आवेदन भेजे हैं।
भूमि की कमी से निवेशक बदायूं-पीलीभीत की ओर झुकाव में
कुछ प्रमुख उद्योग, जैसे रिलायंस इंडस्ट्रीज और इंद्रप्रस्थ बायोफ्यूल्स, ने बरेली में भूमि उपलब्ध न होने की वजह से अपने प्रोजेक्ट बदायूं या पीलीभीत में स्थानांतरित करने पर विचार शुरू कर दिया है। इसके बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि प्रतिनिधियों से बातचीत कर तुरंत उपयुक्त जमीन के विकल्प तय किए जाएं।
विभागवार लक्ष्य-किस विभाग पर कितनी जिम्मेदारी?
पर्यटन को 2,000 करोड़, उद्यान को 1,200 करोड़, गन्ना और नेडा को 1,000- 1,000 करोड़, MSME एवं एक्सपोर्ट को 400 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है। स्वास्थ्य, डेयरी, सहकारिता और खाद्य एवं पूर्ति विभागों को 250-250 करोड़, वन को 250 करोड़, आबकारी व उच्च शिक्षा को 150-150 करोड़ और एफएसडीए व चिकित्सा शिक्षा को 100-100 करोड़ की जिम्मेदारी सौंपी गई है। माध्यमिक शिक्षा को 30 करोड़, हैंडलूम/टेक्सटाइल को 20 करोड़, पशुपालन को 5 करोड़ और बेसिक शिक्षा विभाग को 2 करोड़ का लक्ष्य दिया गया है।
अधिकारियों का बयान
उपायुक्त उद्योग विकास यादव ने कहा कि जिले को 15,000 करोड़ रुपये का बड़ा लक्ष्य दिया गया है। विभागों को लक्ष्य आवंटित कर दिए गए हैं और अब तक 2,500 करोड़ के करार किए जा चुके हैं। निवेशकों के साथ लगातार संवाद बढ़ाकर निर्धारित लक्ष्य को तय समय में पूरा करने की दिशा में तेजी से काम चल रहा है।
