लेखक
संजीव मेहरोत्रा
आधुनिक भारत के निर्माता और भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन पूरे देश में बाल दिवस के रूप में हर्षोल्लास से मनाया गया। 14 नवंबर 1889 को जन्मे नेहरू जी को आज एक बार फिर देश ने उनके असाधारण योगदान के लिए श्रद्धांजलि दी।
आज़ादी की प्रथम रात लिया था ऐतिहासिक संकल्प
देश की आज़ादी की पहली आधी रात पंडित नेहरू ने एक ऐसा प्रण लिया था, जिसने भारत के विकास की दिशा हमेशा के लिए तय कर दी। उन्होंने कहा था कि जब तक देश के अंतिम व्यक्ति की आंख से आंसू और पेट से भूख मिटाने की व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। यही संकल्प उनके हर निर्णय और हर योजना में दिखाई देता है।
पंचवर्षीय योजनाओं से रखा विकास का मजबूत आधार
नेहरू जी ने प्लानिंग कमीशन के माध्यम से पंचवर्षीय योजनाओं की शुरुआत की, जिसने भारत के बुनियादी ढांचे की नींव रखी।
पहली पंचवर्षीय योजना पूरी होने से पहले ही देश में बड़े संस्थान और सेवाएं स्थापित हो चुकी थीं, जिनमें शामिल हैं—
IIT और प्रमुख विश्वविद्यालय
GAIL, BHEL, SAIL, ONGC, NTPC, NHPC जैसी महत्त्वपूर्ण संस्थाएं
स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
प्राकृतिक संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग की व्यवस्था
देशभर में सड़कों का जाल
बड़े बाँध
कृषि सुधारों के तहत खाद कारखाने और उन्नत बीज
नेहरू देश को ठीक उसी तरह गढ़ रहे थे जैसे कोई जिम्मेदार मुखिया अपने परिवार को संवारने में जुट जाता है।
आज की सामाजिक योजनाओं की जड़ें नेहरू के मॉडल में
आज समाज के कमजोर तबकों को मिलने वाली नौकरी, आरक्षण, गरीबों की पढ़ाई-लिखाई, दवाई, किसानों की सिंचाई, और बुजुर्गों-दिव्यांगों-विधवाओं को मिलने वाली पेंशन—इन सबकी बुनियाद नेहरू जी द्वारा बनाए गए उसी आधारभूत ढांचे पर टिकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह ढांचा कमजोर हुआ तो देश का आम नागरिक कई सुविधाओं से वंचित हो सकता है।
नेहरू की नीतियों को अपनाने की जरूरत
सामाजिक कार्यकर्ता संजीव मेहरोत्रा का कहना है कि नेहरू जी के सपनों को साकार करने के लिए हमें वैकल्पिक नेता नहीं, बल्कि वैकल्पिक नेहरू-नीतियों को अपनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि आज के दिन हमें उनके विज़न को समझकर भविष्य निर्माण की दिशा तय करनी चाहिए।
जयंती पर शुभकामनाओं का सिलसिला
पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती पर संजीव मेहरोत्रा ने सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दीं, साथ ही उनके विचारों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
