देहरादून/मुरादाबाद/लखनऊ : उत्तराखंड के देहरादून में बादल फटने के कारण आई बाढ़ में मुरादाबाद मंडल के सात मजदूरों की मौत हो गई है, जबकि कई अभी भी लापता हैं। हादसे से मुंडिया जैन (बिलारी, मुरादाबाद) और रहरा (हसनपुर, अमरोहा) जैसे गांवों में मातम का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और प्रशासन राहत व खोज अभियान में जुटा हुआ है।
मुंडिया जैन में बड़ा हादसा
मुरादाबाद जिले की बिलारी तहसील के मुंडिया जैन गांव से करीब 20 मजदूर कुछ दिन पहले देहरादून के सहसपुर क्षेत्र में मजदूरी करने गए थे। मंगलवार तड़के ये मजदूर टॉस नदी के किनारे बजरी और रेत निकालने का काम कर रहे थे। तभी सहस्रधारा क्षेत्र में बादल फट गया और नदी का जलस्तर अचानक बढ़कर ट्रैक्टर -ट्रॉली समेत मजदूरों को बहा ले गया।
हादसे में मृतक मजदूरों के नाम
इस हादसे में मदन (45 वर्ष),नरेश (48 वर्ष),हरचरन (60 वर्ष),सोमवती (55 वर्ष), रीना (31 वर्ष),किरन (35 वर्ष) समेत सभी शव बरामद कर लिए गए हैं। इसके अलावा बताया जाता है कि राजकुमार (21 वर्ष), होराम (32 वर्ष), सुंदरी (42 वर्ष) के लापता होने की बात सामने आई है।
रहरा गांव में भी बाढ़ का कहर
अमरोहा जिले के हसनपुर क्षेत्र के रहरा और आसपास के गांवों के 11 मजदूर भी देहरादून के बाजावाला गांव में काम कर रहे थे। रिस्पना नदी का जलस्तर बढ़ने से इन मजदूरों पर भी संकट आ पड़ा। तेज बहाव में रहरा निवासी पुष्पेंद्र (20 वर्ष), पीतम (22 वर्ष) और पंकज (27 वर्ष) बह गए। पंकज का शव बरामद कर लिया गया है, जबकि पुष्पेंद्र और पीतम का कोई सुराग नहीं मिला है।
गांवों में पसरा मातम
मुंडिया जैन और रहरा गांव में हादसे की खबर मिलते ही कोहराम मच गया। परिजन रोते-बिलखते देहरादून रवाना हो गए। प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि घटनास्थल पर जाकर परिवारों को सांत्वना दे रहे हैं। राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं।
प्रशासन ने की यह अपील
स्थानीय प्रशासन ने अपील की है कि नदियों के किनारे काम करने वाले मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। खोज अभियान जारी है और लापता मजदूरों की तलाश के लिए विशेष टीमें काम कर रही हैं।
