बाराबंकी/ लखनऊ : ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक ऐतिहासिक तथ्य ने सबका ध्यान खींचा है। ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से गहरा रिश्ता है। खामेनेई के दादा सैय्यद अहमद मुसावी का जन्म किंतूर गांव में हुआ था। यह गांव सिरौली गौसपुर तहसील में स्थित है।
भारतीय मूल के थे अयातुल्ला खामेनेई के दादा
इतिहासकारों और स्थानीय लोगों के अनुसार, सैय्यद अहमद मुसावी का जन्म 1790 में किंतूर में हुआ था। धार्मिक और सामाजिक रूप से सक्रिय मुसावी 1830 में अवध के नवाब के साथ एक धार्मिक यात्रा पर इराक और फिर ईरान गए। वहीं के एक कस्बे खुमैन में बस गए। अपनी पहचान बनाए रखने के लिए उन्होंने अपने नाम के आगे “हिंदी” उपनाम जोड़ लिया, और इस तरह वह वहां सैय्यद अहमद मुसावी हिंदी के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
खुमैनी वंश की चौथी पीढ़ी कर रही है ईरान पर राज
सैय्यद अहमद मुसावी के पोते रूहुल्लाह खामेनी (अयातुल्ला खामेनेई) ने 1979 की ईरानी क्रांति के बाद देश की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने ईरान के राजा पहलवी वंश के खिलाफ क्रांति का नेतृत्व किया। उन्हें निर्वासन में भेजा गया और उन्हें “भारतीय एजेंट” कहकर प्रचारित किया गया, लेकिन जनता उनके साथ खड़ी रही। 1 फरवरी 1979 को जब खामेनेई 14 वर्षों बाद ईरान लौटे, तो वहां एक इस्लामी गणराज्य की स्थापना हुई और उन्हें पहला सुप्रीम लीडर बनाया गया। आज मुसावी की चौथी पीढ़ी ईरान की सत्ता में है।
आज भी हैं रिश्तेदार किंतूर में
किंतूर गांव के निवासी डॉ. सैय्यद मोहम्मद रेहान काज़मी मीडिया को बताते हैं कि उनके कई रिश्तेदार अभी भी ईरान में रहते हैं। उनके भाई आबिद काज़मी इस समय ईरान में ही हैं और धर्मशास्त्र की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। गांव के प्रधान मोहम्मद अकरम का कहना है कि ईरान-इजरायल संघर्ष में गांव के लोगों की सहानुभूति ईरान के साथ है।
ईरान-इजरायल के बीच बढ़ा तनाव
वर्तमान में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे टकराव ने फिर दुनिया की निगाहें इस क्षेत्र पर जमा दी हैं। हाल ही में ईरान ने इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। सोरोका मेडिकल सेंटर, जो इजरायल के दक्षिण का प्रमुख अस्पताल है, उसे भी निशाना बनाया गया है। ईरानी प्रतिक्रिया इजरायल के हमले के जवाब में और तेज़ बताई जा रही है।
