पीलीभीत: सदर विधानसभा की मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) रहे दो एसडीएम मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को निलंबित करने के निर्देश जारी किए हैं। दोनों अधिकारियों के आरोपपत्र जांच के लिए भेजे जाएंगे। आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों को बहाल नहीं किया जाए। इससे पहले दोनों का लखनऊ तबादला किया गया था, लेकिन शासन ने नई तैनाती देने के बजाय उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया था।
13,779 आवेदनों के दस्तावेज नहीं मिले
जांच में पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र संख्या 127 में 31 मई से 29 अगस्त के बीच मतदाता विवरण में संशोधन के लिए फॉर्म-8 के कुल 13,779 आवेदन दर्ज मिले। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकार किए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त किए गए। जांच के दौरान इन आवेदनों से जुड़े भौतिक फॉर्म और सहायक दस्तावेज संबंधित कार्यालय में नहीं मिले। मतदाताओं ने मतदाता सूची में नाम और पिता का नाम बदलने के साथ ही बिना उचित कारण नाम काटे जाने की शिकायतें की थीं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी मतदाता सूची में अनियमितताओं का मुद्दा उठाया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए चुनाव आयोग के निर्देश पर शहर कोतवाली में दोनों एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।
तबादले के बाद नई तैनाती के बजाय प्रतीक्षारत किए गए थे अधिकारी
मामले के बीच शुक्रवार को शासन की तबादला सूची में दोनों अधिकारियों को पीलीभीत से हटाकर नई जिम्मेदारी दी गई थी। हेमंत चौधरी को उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण में विशेष कार्याधिकारी और मयंक गोस्वामी को लखनऊ में बंदोबस्त अधिकारी बनाया गया था। हालांकि, अगले ही दिन शनिवार को दोनों अधिकारियों की नई तैनाती निरस्त कर उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया।
आयोग की अनुमति के बिना नहीं होगी बहाली
अब चुनाव आयोग ने दोनों अधिकारियों के निलंबन के निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही उनके खिलाफ आरोपपत्रों को जांच के लिए भेजने और आयोग की पूर्व अनुमति के बिना बहाल नहीं करने की बात कही है। मतदाता सूची में संशोधन से जुड़े दस्तावेजों के गायब होने और मतदाताओं की शिकायतों के बाद यह कार्रवाई प्रशासनिक महकमे में चर्चा का विषय बनी हुई है।
रिपोर्टर: ऋतिक द्विवेदी
