लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने भाजपा और प्रदेश सरकार पर मतदाता सूची में गड़बड़ी कराने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि भाजपा कार्यकर्ता अधिकारियों के साथ मिलकर सपा समर्थकों के नाम मतदाता सूची से कटवा रहे हैं और भाजपा समर्थकों के नाम जुड़वा रहे हैं। उन्होंने निर्वाचन आयोग से मामले का संज्ञान लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस तरह की शिकायत मिलने से इनकार करते हुए संबंधित विधानसभा क्षेत्र की जानकारी मांगी है।
रामगोपाल यादव ने लगाया एसडीएम की आईडी के दुरुपयोग का आरोप
रामगोपाल यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट कर आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कुछ अधिकारी अपनी आईडी और पासवर्ड भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं को दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कार्यकर्ता वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर ऑपरेटर के साथ बैठकर सपा समर्थकों के नाम कटवाने और भाजपा समर्थकों के नाम जुड़वाने का काम कर रहे हैं। सपा सांसद ने आरोप लगाया कि अधिकारियों की आईडी पर आने वाले ओटीपी के जरिए मतदाता सूची में बदलाव को मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस कथित साजिश के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में करीब 10 हजार सपा समर्थकों के वोट काटने का लक्ष्य रखा गया है। रामगोपाल यादव ने निर्वाचन आयोग से पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मांगी शिकायत, जांच का दिया भरोसा
रामगोपाल यादव के आरोपों पर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उनकी पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि इस संबंध में अभी तक इस तरह की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। नवदीप रिनवा ने रामगोपाल यादव से अनुरोध किया कि यदि प्रदेश की किसी एक विधानसभा के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ) के संबंध में ऐसी शिकायत या संदेह है तो उसकी जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने भरोसा दिया कि शिकायत मिलने पर तत्काल जांच कराकर प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।
4 जनवरी 2027 को प्रकाशित होगी अंतिम मतदाता सूची
उत्तर प्रदेश में निर्वाचन आयोग की ओर से सभी विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराया जा रहा है। इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़ने के साथ ही सूची में मौजूद नामों और विवरणों में सुधार किया जाएगा। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, मतदान केंद्रों का युक्तिकरण और पुनर्गठन दो नवंबर तक पूरा किया जाना है। इसके बाद 12 नवंबर को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होगा। सूची में नाम जुड़वाने, हटवाने या संशोधन कराने के लिए 12 नवंबर से 11 दिसंबर तक दावे और आपत्तियां दर्ज की जा सकेंगी। प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच के बाद उनका निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद चार जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। ऐसे में पुनरीक्षण प्रक्रिया के बीच रामगोपाल यादव के आरोपों ने प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची की निष्पक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
