प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी बोले- टिकट काटने का कोई तय प्रतिशत नहीं, हर उम्मीदवार की होगी समीक्षा; जीत की संभावना के आधार पर लिया जाएगा फैसला
उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। इस बीच चर्चा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने कई मौजूदा विधायकों के टिकट काट सकती है। कुछ अटकलों में 40 प्रतिशत विधायकों के टिकट बदले जाने की बात कही जा रही है। इस सवाल पर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए साक्षात्कार में पार्टी की उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के बारे में बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा में टिकट काटने या बदलने के लिए 40 या 50 प्रतिशत का कोई निश्चित फार्मूला नहीं है।
‘हमारी पार्टी किसी परिवार या एक व्यक्ति की पार्टी नहीं’
पंकज चौधरी ने कहा कि भाजपा में फैसले किसी एक व्यक्ति या परिवार के आधार पर नहीं लिए जाते, बल्कि सामूहिक रूप से निर्णय होता है। उम्मीदवारों के चयन में जिला अध्यक्षों, संगठन के क्षेत्रीय अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी जानकारी ली जाती है। सभी से मिले सुझावों और आकलन के आधार पर टिकटों पर विचार किया जाता है। उन्होंने समझाया कि पार्टी की चुनावी रणनीति का मुख्य उद्देश्य जीतने की संभावना वाले उम्मीदवारों को मैदान में उतारना है। इसलिए पहले से यह तय कर देना कि इतने प्रतिशत विधायकों के टिकट काटे जाएंगे, सही नहीं है।
कल्याण सिंह से जुड़ा किस्सा सुनाकर समझाई चयन प्रक्रिया
पंकज चौधरी ने वर्ष 1993 के विधानसभा चुनाव से जुड़ा एक पुराना किस्सा साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह भाजपा में नए थे और उनके जिले से विधानसभा उम्मीदवारों के नामों का पैनल आया था। तत्कालीन वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह ने टिकटों पर चर्चा के लिए उनके घर को बैठक का स्थान बनाया था। इस बैठक में कलराज मिश्र सहित संसदीय बोर्ड से जुड़े अन्य नेता भी पहुंचे थे। चौधरी के मुताबिक, उन्होंने कल्याण सिंह से अपने जिले की पांच विधानसभा सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवारों को टिकट देने का आग्रह किया। उन्होंने भरोसा जताया कि इन पांच उम्मीदवारों में से कम से कम चार को जिताकर लाएंगे। उनके अनुसार, कल्याण सिंह ने उनसे यह बात लिखित रूप में दर्ज कराई और परिणाम आने पर पांच में से चार उम्मीदवार जीत गए। उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने अपने जिले के पांच उम्मीदवारों के नाम सुझाए और उनमें से चार को जीत मिली। पंकज चौधरी ने कहा कि इन अनुभवों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का उनके आकलन पर भरोसा बढ़ा।
रामपाल सिंह का उदाहरण देकर बताया, कैसे जुटाई जाती है जानकारी
पंकज चौधरी ने सिद्धार्थनगर के तत्कालीन सांसद रामपाल सिंह से जुड़ा एक और प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि एक समय रामपाल सिंह की तबीयत को लेकर उनके विरोधियों की ओर से कथित तौर पर ऐसी जानकारी पहुंचाई जा रही थी कि वह चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं। चौधरी के मुताबिक, उन्हें रामपाल सिंह की स्वास्थ्य स्थिति की वास्तविक जानकारी थी। उन्होंने रामपाल सिंह को अपनी स्थिति स्पष्ट करने और स्वास्थ्य संबंधी प्रमाण देने की सलाह दी थी। बाद में उन्हें टिकट मिल गया। इस उदाहरण के जरिए पंकज चौधरी ने बताया कि उम्मीदवारों की स्थिति का आकलन करने के लिए पार्टी अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाती है। उनके अनुसार, उम्मीदवारों के चयन में केवल किसी एक नेता की राय पर निर्भर नहीं रहा जाता, बल्कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती है।
हर उम्मीदवार की होगी समीक्षा
पंकज चौधरी ने दोहराया कि आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट देने से पहले हर उम्मीदवार की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने के कई स्तर हैं और उन पर चर्चा के बाद ही प्रत्याशियों के नाम तय होंगे। जीत की संभावना को चयन में विशेष महत्व दिया जाएगा। इस तरह भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने 40 प्रतिशत मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की चर्चा को किसी तय रणनीति के रूप में स्वीकार नहीं किया। हालांकि, आगामी चुनाव में किन विधायकों को दोबारा मौका मिलेगा और किनके टिकट बदले जाएंगे, इसका फैसला पार्टी की समीक्षा और चुनावी रणनीति के बाद ही स्पष्ट होगा।
