नोएडा: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजकुमार भाटी विवादों में घिर गए हैं। ग्रेटर नोएडा के दादरी थाने में उनके खिलाफ कथित भड़काऊ भाषण देने और बाहरी आर्थिक मदद लेने के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला दिल्ली में आयोजित बौद्ध महासभा के धम्म दीक्षा कार्यक्रम में उनके 22 प्रतिज्ञाएं लेने के बाद सामने आया है। प्रतिज्ञाओं का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद राजनीतिक विवाद तेज हो गया। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
बौद्ध धम्म दीक्षा कार्यक्रम में 22 प्रतिज्ञाएं लेने पर विवाद
राजकुमार भाटी ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित बौद्ध महासभा के कार्यक्रम में धम्म दीक्षा के दौरान 22 प्रतिज्ञाएं ली थीं। इन प्रतिज्ञाओं में हिंदू देवी-देवताओं की पूजा नहीं करने और उन्हें न मानने से संबंधित प्रतिज्ञाएं भी शामिल हैं। कार्यक्रम का वीडियो प्रसारित होने के बाद उनके धर्म परिवर्तन को लेकर चर्चा शुरू हो गई। हालांकि, भाटी ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने धर्म परिवर्तन नहीं किया है और वह हिंदू ही हैं। इस घटनाक्रम के बाद उनकी प्रतिज्ञाओं और सार्वजनिक बयान को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
रामगोपाल यादव ने दी प्रवक्ता पद से हटाने की चेतावनी
राजकुमार भाटी के बयान और प्रतिज्ञाओं को लेकर समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने नाराजगी जताई। इटावा में शुक्रवार को उन्होंने कहा कि भाटी का बयान व्यक्तिगत हो सकता है, लेकिन पार्टी इसका विरोध कर चुकी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस तरह के बयान जारी रहे तो भाटी को पार्टी के प्रवक्ता पद से हटाया जा सकता है। सपा नेता शिवपाल यादव ने भी इस मामले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि राजकुमार भाटी ने जो प्रतिज्ञा ली, वह गलत थी और उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। शिवपाल यादव के मुताबिक, पार्टी में सभी लोग ईश्वर को मानते हैं और इस तरह का कदम अनुशासनहीनता है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी राजनीतिक प्रतिक्रिया
राजकुमार भाटी की प्रतिज्ञाओं को लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गुर्जर समुदाय के कुछ लोगों की नाराजगी की खबरें सामने आई हैं। इस घटनाक्रम ने समाजवादी पार्टी के भीतर भी असहज स्थिति पैदा की है। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ भाजपा के बीच धार्मिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होने की संभावना है। फिलहाल, दादरी थाने में दर्ज मुकदमे में लगाए गए आरोपों की जांच और पुलिस की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। वहीं, इस विवाद पर समाजवादी पार्टी के नेताओं की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट है कि पार्टी नेतृत्व ने राजकुमार भाटी के इस कदम से दूरी बनाने का संकेत दिया है।
