सौरभ राजपूत हत्याकांड के बाद से पुलिस की सील में बंद है मकान, बुजुर्ग मालिक घर बेचकर गांव लौटना चाहते हैं; चाबी पुलिस के पास होने और खरीदार नहीं मिलने से बढ़ी मुश्किलें
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड से जुड़ा वह मकान करीब 18 महीने बाद भी वीरान पड़ा है, जहां मार्च 2025 में सौरभ की हत्या हुई थी। इस मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है, लेकिन मकान मालिक ओमपाल सिंह को अब तक अपने घर का कब्जा नहीं मिल पाया है। ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर स्थित इस मकान पर पुलिस की सील लगी हुई है। बुजुर्ग मकान मालिक अब मकान बेचकर गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन घर बंद होने और खरीदार नहीं मिलने के कारण उनकी परेशानी लगातार बढ़ रही है।
इंदिरा नगर के इसी मकान में हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में करीब 200 गज का एक मकान है। मकान मालिक ओमपाल सिंह ने इसके निचले हिस्से को किराए पर दिया था। इसी हिस्से में सौरभ राजपूत अपनी पत्नी मुस्कान रस्तोगी के साथ रहता था। मार्च 2025 में इसी मकान में सौरभ की हत्या हुई थी। घटना का खुलासा होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया। पुलिस ने जांच के दौरान मकान और उसके मुख्य गेट पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया था। इसके बाद से मकान बंद पड़ा है और मालिक को उसका इस्तेमाल करने का मौका नहीं मिल पाया है।
पुलिस के पास है मकान की चाबी, अंदर पड़ा है सामान
घटना को करीब डेढ़ साल बीत चुका है, लेकिन मकान अब भी बंद है। मकान की चाबी पुलिस के पास बताई जा रही है। घर के बाहर और बरामदे में रखा सामान भी लंबे समय से वहीं पड़ा हुआ है। मकान से जुड़ी घटना के कारण यह जगह आज भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। मकान मालिक ओमपाल सिंह के लिए यह स्थिति परेशानी का कारण बनी हुई है। वह मकान बेचकर गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन घर सील होने और खरीदार नहीं मिलने से उनकी योजना आगे नहीं बढ़ पा रही है।
मकान मालिक को कब्जे का इंतजार, घर बेचने में भी आ रही परेशानी
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद भी मकान मालिक की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। उनका मकान अब तक पुलिस की सील में बंद है और उन्हें घर का कब्जा मिलने का इंतजार है। मकान बंद होने के कारण उसकी देखरेख और बिक्री को लेकर भी समस्या बनी हुई है। ओमपाल सिंह अब इस मकान से छुटकारा पाकर गांव लौटना चाहते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में यह उनके लिए आसान नहीं हो पा रहा है। फिलहाल मकान को लेकर आगे की कार्रवाई कब होगी और मालिक को उसका कब्जा कब मिलेगा, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
