राष्ट्रपति ने समानता और समावेशिता को बताया भगवान राम की कथा का आदर्श, पीएम मोदी बोले- सत्ता का उद्देश्य शासन करना नहीं, बल्कि जनकल्याण होना चाहिए
दिल्ली : विजयादशमी का पर्व देशभर में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया गया। राजधानी दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 स्थित श्रीरामलीला कमेटी के मैदान में आयोजित दशहरा समारोह में हिस्सा लिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। दोनों ने भगवान श्रीराम के आदर्शों, सत्य की विजय, सामाजिक समानता और जनकल्याण का संदेश दिया।
राष्ट्रपति मुर्मू बोलीं- समानता और समावेशिता के आदर्शों पर आगे बढ़ रहा भारत
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित दशहरा समारोह के दौरान प्रतीकात्मक रूप से तीर चलाकर रावण दहन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि दशहरा के अवसर पर देश-विदेश में आयोजित रामलीलाओं के माध्यम से करोड़ों लोग रामकथा के महान आदर्शों को याद करते हैं। राष्ट्रपति ने प्रकृति के संरक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में प्रकृति के सम्मान का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि संविधान में भी नागरिकों के मूल कर्तव्यों के अंतर्गत नदियों, झीलों, वनों और वन्यजीवों की रक्षा तथा संरक्षण की बात कही गई है।उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि आज का भारत भगवान राम की कथा में दर्शाए गए समानता और समावेशिता के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।
पीएम मोदी बोले- भारत का कोना-कोना राममय
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लेते हुए देशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने प्रभु श्रीराम, माता जानकी और बजरंगबली को नमन करते हुए कहा कि देशभर में रामलीलाओं का मंचन भगवान राम के आदर्शों को जीवंत बनाए रखता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अत्याचार और आतंक के अंत तथा असत्य पर सत्य की विजय का विश्वास भारतीय संस्कृति की प्राण ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि भगवान राम की आस्था केवल रावण के अंत तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीवन से मिलने वाली शिक्षाएं भी इसका महत्वपूर्ण आधार हैं। पीएम मोदी के अनुसार, रामराज्य का अर्थ ऐसा शासन है, जहां किसी के साथ भेदभाव न हो, सभी को न्याय मिले, समान अवसर प्राप्त हों और सत्ता का उद्देश्य जनकल्याण हो। उन्होंने गरीबों और वंचितों की सेवा को सर्वोपरि रखने तथा नागरिकों को सम्मान देने की बात कही।
संकल्प, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक धरोहरों पर भी दिया जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि संकट कितना भी बड़ा हो और चुनौती कितनी भी कठिन, लोगों को दूसरों के भरोसे बैठने के बजाय अपनी क्षमता पहचाननी चाहिए। उन्होंने भगवान राम के समुद्र पार कर लंका पहुंचने के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि सामूहिक शक्ति, जनभागीदारी और दृढ़ संकल्प से कठिन लक्ष्यों को भी हासिल किया जा सकता है। पीएम मोदी ने भारत की सांस्कृतिक धरोहरों का जिक्र करते हुए कहा कि सदियों तक देश की प्राचीन धरोहरों को लूटकर विदेश ले जाया गया, लेकिन अब उन्हें वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते 12 वर्षों में साढ़े 600 से अधिक प्राचीन मूर्तियां भारत वापस लाई गई हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि विजयादशमी साहस, सत्य और मानवता के साथ खड़े रहने की प्रेरणा देती है। उनके मुताबिक, इस पर्व का संदेश है कि कठिनाइयां कितनी भी बड़ी हों, दृढ़ संकल्प और सत्य के मार्ग पर चलकर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
