छात्रा का शुगर लेवल 40 पहुंचने पर अस्पताल में भर्ती, 25 हजार रुपये मासिक स्टाइपेंड की मांग पर अड़े विद्यार्थी
बरेली : भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI) में इंटर्नशिप स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विद्यार्थियों का आंदोलन जारी है। भूख हड़ताल के बीच एक छात्रा की तबीयत अचानक बिगड़ गई। विद्यार्थियों के अनुसार, जांच के दौरान छात्रा का ब्लड ग्लूकोज लेवल 40 पाया गया। हालत बिगड़ने पर उसे संस्थान परिसर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के बाद उसकी स्थिति सामान्य होने की जानकारी सामने आई। घटना के बाद धरना स्थल पर मेडिकल टीम तैनात करने का आश्वासन दिया गया। इसके बावजूद आंदोलनकारी विद्यार्थी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि संस्थान के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अब तक उन्हें लिखित आश्वासन नहीं मिला है। विद्यार्थियों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त करने पर विचार नहीं किया जाएगा।
भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ी छात्रा की तबीयत
प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों के मुताबिक,करीब छह बजे धरना स्थल पर भूख हड़ताल कर रही एक छात्रा की अचानक तबीयत खराब हो गई। उसकी स्थिति को देखते हुए साथी विद्यार्थियों ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा पर फोन किया। हालांकि, संस्थान के अधिकारियों ने छात्रा को परिसर स्थित अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका उपचार किया गया।
विद्यार्थियों के अनुसार, जांच में छात्रा का ब्लड ग्लूकोज लेवल 40 पाया गया था। उपचार के बाद उसकी स्थिति सामान्य होने की जानकारी मिली। घटना के बाद धरना स्थल पर मेडिकल टीम तैनात करने का आश्वासन दिया गया, ताकि आंदोलन के दौरान विद्यार्थियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों पर नजर रखी जा सके। छात्रा की तबीयत बिगड़ने की घटना ने आंदोलन के बीच विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि, छात्रा की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति और घटना से संबंधित विस्तृत चिकित्सकीय जानकारी स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सकी है।
12 महीने की इंटर्नशिप के लिए 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग
IVRI में आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों की प्रमुख मांग इंटर्नशिप के दौरान मिलने वाले स्टाइपेंड से जुड़ी है। विद्यार्थियों का कहना है कि बीवीएससी एवं एएच यानी बैचलर ऑफ वेटरनरी साइंस एंड एनिमल हसबेंड्री पाठ्यक्रम में साढ़े चार वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद 12 महीने की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है। विद्यार्थियों की मांग है कि इंटर्नशिप की पूरी अवधि के दौरान प्रत्येक प्रशिक्षु को 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड दिया जाए। उनका कहना है कि अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करना होता है।इसलिए इस अवधि में मिलने वाली आर्थिक सहायता उनकी जरूरतों के अनुरूप होनी चाहिए। आंदोलनकारी विद्यार्थियों का आरोप है कि वे कई बार अपनी मांगों को संस्थान के अधिकारियों के सामने रख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।उनका कहना है कि मौखिक बातचीत और आश्वासन से उनकी समस्या का समाधान नहीं होगा। वे मांगों पर स्पष्ट निर्णय और लिखित आश्वासन चाहते हैं।
अधिकारियों से कई दौर की बातचीत, फिर भी नहीं बनी सहमति
विद्यार्थियों और संस्थान के अधिकारियों के बीच आंदोलन को लेकर कई दौर की बातचीत होने की बात सामने आई है। इसके बावजूद लिखित आश्वासन नहीं मिलने से विद्यार्थियों में नाराजगी बनी हुई है। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित रूप से सहमति नहीं दी जाती, तब तक धरना जारी रहेगा। यही वजह है कि बातचीत के बाद भी आंदोलन समाप्त नहीं हो सका है।
