सुभासपा-भाजपा के रिश्तों की भी होगी परीक्षा, अब मुस्लिम वोट बैंक पर भाजपा की नजर
लखनऊ/मऊ : पूर्वांचल की सबसे चर्चित सीटों में शामिल मऊ सदर एक बार फिर राजनीतिक बिसात का केंद्र बन गई है। अब्बास अंसारी को दो साल की सजा होने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता छुट्टी के दिन रविवार को रद्द कर दी गई। इसके साथ ही यह सीट खाली हो गई है और अब यहां उपचुनाव की हलचल तेज हो गई है। उमर अंसारी, जो अब परिवार का राजनीतिक चेहरा बनकर उभर रहे हैं। उनके मैदान में उतरने की संभावनाएं भी प्रबल होती जा रही हैं।
अब्बास की जगह उमर ?अंसारी परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर
पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी के निधन के बाद उमर अंसारी अब परिवार का मुख्य चेहरा बनते दिख रहे हैं। वे लगातार समर्थकों से संपर्क बनाए हुए हैं और कोर्ट में अब्बास के साथ दिखना उनकी राजनीतिक मंशा का संकेत दे रहा है। अंसारी परिवार के लिए यह उपचुनाव सिर्फ एक चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक विरासत को बचाने की लड़ाई होगी।
भाजपा का मिशन मऊ, मुस्लिम बहुल सीट पर भगवा फतह की तैयारी
रामपुर, कुंदरकी जैसे मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में हाल ही में जीत दर्ज कर चुकी भाजपा, अब मऊ को लेकर भी गंभीर नजर आ रही है। भाजपा के रणनीतिकार इस सीट को “अंसारी वर्चस्व” के खिलाफ राजनीतिक प्रतीकात्मक लड़ाई के रूप में देख रहे हैं। पार्टी हर हाल में यहां जीत दर्ज करना चाहती है।
सुभासपा बनाम भाजपा, एनडीए में सीट को लेकर हो सकती है टकराहट ?
अब्बास अंसारी 2022 में सुभासपा (सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी) से विधायक बने थे। अब जबकि सुभासपा भाजपा गठबंधन में है यह बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या भाजपा इस सीट पर फिर सुभासपा को मौका देगी या सीधी दावेदारी खुद पेश करेगी ? जानकारों का मानना है कि सीट बंटवारे को लेकर खींचतान तय है।
सिर्फ जीत नहीं, गठबंधन की सेहत भी दांव पर
अब्बास की सदस्यता रद्द होने से विधानसभा में एनडीए की संख्या एक सीट घटकर 290 हो गई है (भाजपा 258, सुभासपा के 6 से 5 विधायक रह गए)। ऐसे में यह उपचुनाव केवल अंसारी परिवार की चुनौती नहीं, बल्कि एनडीए के राजनीतिक संतुलन की भी अग्निपरीक्षा है।
यूपी में किन विधायकों की जा चुकी है सदस्यता?
अब्बास अंसारी अकेले नहीं हैं, जिनकी विधायकी खत्म की गई। पिछले कुछ सालों में यूपी विधानसभा में न्यायिक सजा या अयोग्यता के आधार पर कई विधायकों की सदस्यता समाप्त हो चुकी है। इसमें मुहम्मद आजम खां, अब्दुल्ला आज़म खान (रामपुर), इरफान सोलंकी, कुलदीप सेंगर,विजय मिश्रा, राम दुलार गौड़ आदि की विधानसभा सदस्यता जा चुकी है।
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