विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 11 सीटों के चुनाव का ऐलान, यूपी की 10 सीटों और उत्तराखंड की एक सीट के लिए 16 अक्टूबर को मतदान
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में प्रस्तावित हैं, लेकिन उससे पहले दोनों राज्यों में राज्यसभा की 11 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक इन सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी और जरूरत पड़ने पर 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट शामिल है। इन सीटों पर केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, केंद्रीय राज्य मंत्री बीएल वर्मा, भाजपा नेता अरुण सिंह, सपा नेता राम गोपाल यादव और बसपा नेता रामजी समेत कई मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा हो रहा है। इन सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है।
पश्चिम बंगाल की खाली सीट पर भी उपचुनाव
राज्यसभा चुनाव के साथ पश्चिम बंगाल की एक खाली सीट पर उपचुनाव भी कराया जाएगा। यह सीट राज्यसभा सदस्य रुक्मिणी मलिक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई है। इस सीट पर निर्वाचित होने वाले सदस्य का कार्यकाल दो अप्रैल 2032 तक रहेगा। इस तरह उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल को मिलाकर राज्यसभा की कुल 12 सीटों पर चुनावी प्रक्रिया होगी।
यूपी की 10 सीटों पर मौजूदा स्थिति क्या है?
उत्तर प्रदेश की जिन 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है, उनमें मौजूदा समय में आठ सीटों पर भाजपा, एक पर समाजवादी पार्टी और एक पर बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व है। इन सीटों से जिन सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, उनमें हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा, अरुण सिंह, नीरज शेखर, राम गोपाल यादव, बृजलाल, रामजी, गीता उर्फ चंद्रप्रभा और सीमा शामिल हैं। इसके अलावा डॉ. दिनेश शर्मा के इस्तीफे से एक सीट पहले ही रिक्त हो चुकी है। उन्होंने अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था।
यूपी में एक सीट के लिए 37 विधायकों के मत जरूरी
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मौजूदा गणित के आधार पर राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के मत की जरूरत होगी। उपलब्ध विधानसभा संख्या के मुताबिक भाजपा गठबंधन के पास करीब 290 विधायक हैं। इस गणित के आधार पर भाजपा खेमे की सात सीटों पर स्थिति मजबूत मानी जा रही है। सात सीटों के बाद उसके पास करीब 31 विधायक बचेंगे, जिससे अगली सीट के लिए आवश्यक संख्या पूरी नहीं होती है। वहीं सपा गठबंधन के पास करीब 103 विधायक बताए जा रहे हैं। इस संख्या के आधार पर दो सीटों के लिए पर्याप्त संख्या बनती है, जबकि तीसरी सीट के लिए करीब 29 विधायक बचते हैं। यानी आवश्यक संख्या से कम मत होने के कारण उस सीट के लिए अतिरिक्त समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि राज्यसभा चुनाव में अंतिम स्थिति उम्मीदवारों के नामांकन, समर्थन और मतदान के दौरान बनने वाले समीकरणों पर निर्भर करेगी।
बसपा के पास यूपी विधानसभा में एक भी विधायक नहीं
उत्तर प्रदेश विधानसभा में इस समय बसपा का कोई विधायक नहीं है। ऐसे में मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर राज्यसभा चुनाव में पार्टी की स्थिति अलग है। बसपा के राज्यसभा सदस्य रामजी का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो रहा है। लिहाजा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश से राज्यसभा में बसपा का प्रतिनिधित्व बना रहता है या नहीं, यह चुनावी प्रक्रिया और परिणाम पर निर्भर करेगा।
उत्तराखंड की एक सीट पर भी होगा चुनाव
उत्तराखंड से राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव कराया जाएगा। मौजूदा राज्यसभा सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। राज्य विधानसभा में दलों की मौजूदा संख्या के आधार पर चुनाव में मुकाबले की स्थिति तय होगी। अंतिम परिणाम मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
विधान परिषद की 28 सीटों पर भी चुनाव का ऐलान
राज्यसभा चुनाव के साथ चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की 28 सीटों के लिए भी चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 11, बिहार की आठ, महाराष्ट्र की पांच और कर्नाटक की चार सीटें शामिल हैं। इन सीटों के लिए भी नामांकन प्रक्रिया 29 सितंबर से शुरू होगी, जबकि मतदान 23 अक्टूबर को कराया जाएगा।
राज्यसभा चुनाव का पूरा कार्यक्रम
- 29 सितंबर 2026 — नामांकन प्रक्रिया शुरू
- 6 अक्टूबर — नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख
- 7 अक्टूबर — नामांकन पत्रों की जांच
- 9 अक्टूबर — नाम वापसी की अंतिम तारीख
- 16 अक्टूबर — मतदान
- 16 अक्टूबर शाम — मतगणना
- 19 अक्टूबर — चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 11 राज्यसभा सीटों के साथ पश्चिम बंगाल की रिक्त सीट का उपचुनाव भी इसी प्रक्रिया के तहत होगा। इन चुनावों के नतीजे 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों राज्यों के राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
