उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर नियमित चुनाव, पश्चिम बंगाल की एक खाली सीट पर उपचुनाव; 29 सितंबर को अधिसूचना जारी होगी
नई दिल्ली: निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल की कुल 12 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इनमें उत्तर प्रदेश की 10 और उत्तराखंड की एक सीट पर नियमित चुनाव होंगे, जबकि पश्चिम बंगाल की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जाएगा। सभी 12 सीटों के लिए 16 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा और उसी दिन शाम पांच बजे से मतगणना शुरू होगी।
29 सितंबर को जारी होगी अधिसूचना
चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार 29 सितंबर को चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। उम्मीदवार 6 अक्टूबर तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अक्टूबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी, जबकि 9 अक्टूबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे। 16 अक्टूबर को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान कराया जाएगा। इसके बाद शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी। चुनाव प्रक्रिया 19 अक्टूबर तक पूरी कर ली जाएगी।
यूपी की 10 राज्यसभा सीटों पर चुनाव
उत्तर प्रदेश में 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है। इनमें आठ सीटें वर्तमान में भाजपा के पास और एक-एक सीट समाजवादी पार्टी तथा बहुजन समाज पार्टी के पास है। इन सीटों पर मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। सेवानिवृत्त होने वाले सदस्यों में भाजपा के हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह, गीता उर्फ चंद्रप्रभा, नीरज शेखर, बृजलाल, बीएल वर्मा और सीमा द्विवेदी शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव और बहुजन समाज पार्टी के रामजी लाल गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।
दिनेश शर्मा की सीट पहले ही हो चुकी है खाली
उत्तर प्रदेश की 10वीं सीट पूर्व उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद उन्होंने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा 11 सितंबर 2026 से प्रभावी हुआ।
यूपी में विधानसभा के संख्या बल से तय होगा समीकरण
राज्यसभा के सदस्यों का चुनाव सीधे जनता नहीं करती, बल्कि संबंधित राज्य के निर्वाचित विधायक आनुपातिक प्रतिनिधित्व और एकल संक्रमणीय मत प्रणाली के जरिए मतदान करते हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश की 10 सीटों के चुनाव में मौजूदा विधानसभा का संख्या बल महत्वपूर्ण होगा। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के आधार पर मीडिया रिपोर्टों में भाजपा गठबंधन और समाजवादी पार्टी की संभावित सीटों को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आ रहे हैं। हालांकि अंतिम तस्वीर उम्मीदवारों के नामांकन और चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बसपा के राज्यसभा प्रतिनिधित्व पर भी नजर
रामजी लाल गौतम की सीट का कार्यकाल समाप्त होने के साथ बसपा के राज्यसभा प्रतिनिधित्व को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अगस्त 2026 में पार्टी के एकमात्र विधायक उमाशंकर सिंह के निधन के बाद उत्तर प्रदेश विधानसभा में बसपा का कोई विधायक नहीं है। 2020 में भी बसपा के पास अकेले राज्यसभा सदस्य चुनने के लिए पर्याप्त संख्या बल नहीं था। उस समय भाजपा ने 10 में से आठ उम्मीदवार उतारे थे और रामजी लाल गौतम निर्विरोध निर्वाचित हुए थे। उस चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी ने भाजपा और बसपा के बीच राजनीतिक समझ का आरोप लगाया था।
उत्तराखंड की एक सीट पर भी चुनाव
उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनाव होगा। भाजपा के सदस्य नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इस सीट के लिए भी 16 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा।
पश्चिम बंगाल की खाली सीट पर उपचुनाव
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की एक सीट पर उपचुनाव होगा। यह सीट तृणमूल कांग्रेस की सांसद रुक्मिणी मलिक के 16 जुलाई 2026 को इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। रुक्मिणी मलिक अभिनेत्री कोयल मल्लिक के नाम से भी जानी जाती हैं। इस सीट से निर्वाचित होने वाले नए सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2032 तक रहेगा।
पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस
पश्चिम बंगाल की इस सीट के उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ेंगी। यहां विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस का बहुमत है। इसलिए सीट के चुनाव में राज्य की मौजूदा विधानसभा संख्या और राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
एक नजर में पूरा चुनाव कार्यक्रम
- अधिसूचना जारी: 29 सितंबर 2026
- नामांकन की अंतिम तारीख: 6 अक्टूबर 2026
- नामांकन पत्रों की जांच: 7 अक्टूबर 2026
- नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 अक्टूबर 2026
- मतदान: 16 अक्टूबर 2026
- मतदान का समय: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
- मतगणना: 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे से
- चुनाव प्रक्रिया पूरी होने की अंतिम तारीख: 19 अक्टूबर 2026
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले महत्वपूर्ण चुनाव
उत्तर प्रदेश में इन राज्यसभा सीटों का चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। राज्यसभा चुनाव में विधानसभा के मौजूदा संख्या बल की भूमिका होने के कारण राजनीतिक दलों के लिए यह चुनाव संगठनात्मक और संसदीय स्तर पर महत्वपूर्ण रहेगा। हालांकि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी, यह उम्मीदवारों के नामांकन और मतदान के बाद ही तय होगा।
