अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026’ को दी मंजूरी, रूस के ऊर्जा और वित्तीय नेटवर्क पर बढ़ेगा दबाव
वाशिंगटन: अमेरिका ने रूस और ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 18 सितंबर को ‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026’ पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बना दिया। नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई का दायरा बढ़ाया गया है। साथ ही रूस से ऊर्जा खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार राष्ट्रपति को दिया गया है।
रूस के ऊर्जा और वित्तीय नेटवर्क पर सख्ती
नए कानून के तहत रूस से जुड़े अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले विदेशी व्यक्तियों और नेटवर्क पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसमें रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ यानी प्रतिबंधों से बचकर तेल परिवहन करने वाले जहाजों से जुड़े लोगों और संस्थाओं को भी निशाना बनाया गया है। कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय से जुड़ी आर्थिक क्षमता पर दबाव बढ़ाना और यूक्रेन युद्ध के लिए उसके वित्तीय संसाधनों को सीमित करना बताया गया है।
100 प्रतिशत तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का अधिकार
कानून का महत्वपूर्ण प्रावधान अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ देशों के आयात पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार देता है। यह प्रावधान उन प्रमुख देशों को ध्यान में रखता है जो रूसी मूल के कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस का आयात करते हैं अथवा रूस के ऊर्जा प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं। हालांकि, कानून के लागू होते ही किसी भी देश पर स्वतः 100 प्रतिशत शुल्क नहीं लगाया गया है। यह राष्ट्रपति को भविष्य में निर्धारित परिस्थितियों में कार्रवाई करने का अधिकार देता है। कानून में रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के प्रमुख आयातकों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों के खिलाफ लक्षित शुल्क की व्यवस्था की गई है।
भारत और चीन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है कानून
भारत और चीन रूस से ऊर्जा खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं, इसलिए नए अमेरिकी कानून को दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, कानून में भारत या चीन पर तत्काल 100 प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा नहीं की गई है। किस देश पर कार्रवाई की जाएगी और शुल्क कितना होगा, यह आगे अमेरिकी प्रशासन के फैसलों पर निर्भर करेगा। इसी वजह से भारत पर संभावित असर को लेकर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि 100 प्रतिशत शुल्क निश्चित रूप से लागू होगा।
ईरान पर प्रतिबंध पांच साल के लिए बढ़े
नया कानून केवल रूस तक सीमित नहीं है। इसके तहत ईरान प्रतिबंध अधिनियम को भी पांच वर्षों के लिए बढ़ाया गया है। कानून में ईरान के ऊर्जा और हथियार क्षेत्रों से जुड़े प्रतिबंधों को आगे जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
सीनेट और प्रतिनिधि सभा से मिला समर्थन
कानून बनने से पहले इसे अमेरिकी सीनेट ने 7 अगस्त को 86-11 मतों से पारित किया था। इसके बाद प्रतिनिधि सभा ने 16 सितंबर को 262-159 मतों से सीनेट के संशोधनों को मंजूरी दी। इसके बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा गया और 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर दिए। इस कानून का नाम दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ओ. ग्राहम के सम्मान में रखा गया है, जो रूस के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों के प्रमुख समर्थकों में रहे थे।
राष्ट्रपति को छूट देने की भी शक्ति
कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को कुछ परिस्थितियों में प्रतिबंधों और शुल्क संबंधी प्रावधानों से छूट देने की शक्ति भी दी गई है। इसका इस्तेमाल राष्ट्रीय हित से जुड़ी परिस्थितियों में किया जा सकता है। इस व्यवस्था के चलते कानून के प्रावधानों का वास्तविक असर काफी हद तक आगे अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर करेगा।
यूक्रेन ने कानून का स्वागत किया
यूक्रेन ने कानून के पारित होने और ट्रंप द्वारा इसे मंजूरी दिए जाने का स्वागत किया है। यूक्रेन लंबे समय से रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने और उसकी ऊर्जा आय को सीमित करने के लिए सहयोगी देशों से कड़े प्रतिबंधों की मांग करता रहा है। नए अमेरिकी कानून के बाद रूस के ऊर्जा कारोबार, उससे जुड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उन देशों के साथ अमेरिका के आर्थिक संबंधों पर भी असर पड़ने की संभावना है जो रूसी ऊर्जा का आयात जारी रखते हैं।
