खानकाह-ए-सकलैनिया में दिनभर चला इबादत और लंगर का सिलसिला, रात में तकरीरी कार्यक्रम में उलमा ने डाली तालीमात पर रोशनी
बरेली : विश्वविख्यात सूफी बुजुर्ग हज़रत शाह मोहम्मद सकलैन मियां हुज़ूर रहमतुल्लाह अलैह के तीसरे सालाना व परंपरागत उर्स-ए-सकलैनी के तीसरे दिन मंगलवार को खानकाह -ए-सकलैनिया शराफतिया में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ी। देश के अलग-अलग हिस्सों से जायरीन के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। महाराष्ट्र और गुजरात से करीब 700 जायरीन का पारंपरिक सकलैनी कारवां भी बरेली पहुंचा।
फज्र की नमाज के बाद कुरआन ख्वानी से उर्स का आगाज
उर्स के तीसरे दिन कार्यक्रमों की शुरुआत बाद नमाज़-ए-फ़ज्र कुरआन ख्वानी से हुई। इसके बाद खानकाह शरीफ में फातिहा हुई और जायरीन के लिए लंगर का सिलसिला शुरू कर दिया गया। दूर-दराज से पहुंचे अकीदतमंदों ने खानकाह शरीफ में हाजिरी दी और मजार-ए-पाक पर चादर पेश कर अपनी अकीदत और मोहब्बत का इज़हार किया। जायरीन ने अपनी मन्नत-मुरादों के लिए दुआ भी की।
गणेश चतुर्थी के मद्देनजर नहीं निकाले गए चादरों के जुलूस
इस वर्ष गणेश चतुर्थी पर्व को देखते हुए उर्स-ए-सकलैनी में चादरों के जुलूस नहीं निकाले जा रहे हैं। पुलिस-प्रशासन और दरगाह इंतज़ामिया की अपील पर जायरीन से जुलूस की शक्ल में चादर नहीं लाने का अनुरोध किया गया है। जायरीन अपने निजी वाहनों से दरगाह शरीफ पहुंच रहे हैं और खानकाह परिसर में चादर खोलकर मजार-ए-पाक पर पेश कर रहे हैं। दरगाह इंतज़ामिया ने जायरीन से व्यवस्था बनाए रखने और पुलिस-प्रशासन का सहयोग करने की अपील की है।
महाराष्ट्र-गुजरात से 700 जायरीन का सकलैनी कारवां पहुंचा
उर्स में शामिल होने के लिए महाराष्ट्र और गुजरात से करीब 700 जायरीन का पारंपरिक सकलैनी कारवां मंगलवार दोपहर लगभग 3:30 बजे लोकमान्य तिलक (दादर एक्सप्रेस) ट्रेन से बरेली जंक्शन पहुंचा। कारवां में हनीफ वडाला सकलैनी, फैसल बकरानी, सादिक मुछाडा, एहसन सईद, अफजल सकलैनी, नौशाद सकलैनी, जाफर सकलैनी, डॉ. इमरान सकलैनी, उवैस सकलैनी और सूफियान सकलैनी समेत बड़ी संख्या में जायरीन शामिल रहे। सफर के दौरान जायरीन दुरूद शरीफ, तस्बीह और ज़िक्र -ए-इलाही करते हुए बरेली पहुंचे। जायरीन की सुविधा के लिए ट्रेन में मेडिकल सुविधा भी उपलब्ध रही। इस दौरान डॉ. इमरान सकलैनी मौजूद रहे।
बरेली जंक्शन पर कारवां का भव्य स्वागत
बरेली जंक्शन पहुंचने पर मुहिब्बाने ग़ाज़ी-ओ-सकलैनी फाउंडेशन की ओर से कैंप लगाकर सकलैनी कारवां का स्वागत किया गया। स्वागत व्यवस्था में आमिर सकलैनी, मोहसिन आलम,शाबेज सकलैनी,राशिद सकलैनी, मुशाहिद सकलैनी,खुर्रम सकलैनी,सय्यद राशिद,फैसल सकलैनी,राजा सकलैनी,डॉ. समीर, फेमी सकलैनी, अब्बास सकलैनी, जमील सकलैनी और आरिफ सकलैनी समेत अन्य लोगों ने सहयोग किया।
इशा की नमाज के बाद भव्य तकरीरी कार्यक्रम
मंगलवार रात बाद नमाज़-ए-इशा दीवानखाना चौक, दरगाह परिसर में भव्य तकरीरी कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का आगाज़ तिलावत -ए -कलाम -ए-पाक से हुआ सज्जादानशीन पीरो मुर्शिद शाह मोहम्मद ग़ाज़ी मियां हुज़ूर की सरपरस्ती में आयोजित कार्यक्रम में उलमा-ए-किराम ने सिलसिला -ए-कादरिया नक्शबंदिया मुजद्दिदिया के बुजुर्गों की तालीमात और उनके पैगाम पर रोशनी डाली।
मियां हुज़ूर की जिंदगी और खिदमत-ए-खल्क पर तकरीर
इस मौके पर अल्लामा क़ारी अनवार मुरादाबादी,मौलाना मुफ्ती फ़हीम सकलैनी,मौलाना रिफाकत नईमी और मौलाना अबसार सकलैनी ने हज़रत पीरो-मुर्शिद शाह मोहम्मद सकलैन मियां हुज़ूर रहमतुल्लाह अलैह की पाकीज़ा जिंदगी, तालीमात और खिदमत-ए-खल्क के पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उलमा ने कहा कि मियां हुज़ूर को अल्लाह की मखलूक की खिदमत करना और जरूरतमंदों को खाना खिलाना बेहद पसंद था। उनके मुताबिक, मियां हुज़ूर की तालीमात से प्रेरणा लेते हुए आज भी देशभर में समाजसेवा, जरूरतमंद बेटियों की शादियां और गरीब व बेसहारा लोगों की मदद का सिलसिला जारी है। खानकाह शरीफ में भी दूर-दराज से आने वाले जायरीन और मुरीदीन के लिए दिन-रात लंगर की व्यवस्था जारी रहने की बात कही गई।
उर्स में लगातार पहुंच रहे जायरीन
उर्स-ए-सकलैनी में उत्तर प्रदेश के साथ देश के विभिन्न राज्यों से जायरीन और अकीदतमंद लगातार पहुंच रहे हैं। खानकाह शरीफ में हाजिरी, चादरपोशी, फातिहा, कुरआन ख्वानी और दुआ का सिलसिला जारी है।
