एडीजे-8 की अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलें देखने के बाद दिया जमानत का आदेश, 14 जुलाई को न्यायिक अभिरक्षा में भेजी गई थीं कल्पना मिश्रा
बरेली: उत्तराखंड सरकार की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य की शिकायत पर दर्ज हाईप्रोफाइल मामले में जेल भेजी गईं कल्पना मिश्रा उर्फ कल्पना चतुर्वेदी को अदालत से जमानत मिल गई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-8 अशोक कुमार यादव की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कल्पना को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। यह मामला उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी से जुड़ा होने के कारण काफी चर्चा में रहा है। मंत्री की शिकायत पर कल्पना के खिलाफ चोरी, जालसाजी, नाम-पते के कथित दुरुपयोग और धन उगाही जैसे गंभीर आरोप लगाए गए थे। कल्पना को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया था।
रेखा आर्य ने लगाए थे गंभीर आरोप
मंत्री रेखा आर्य की ओर से आरोप लगाया गया था कि कल्पना मिश्रा ने अपने आधार कार्ड, पासपोर्ट समेत कुछ व्यक्तिगत दस्तावेजों में उनके पति गिरधारी लाल साहू का नाम और बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि कल्पना मंत्री के नाम और पद का प्रभाव दिखाकर लोगों पर दबाव बनाती थीं और इसी के जरिए कथित तौर पर धन उगाही करती थीं। मंत्री की शिकायत में यह भी कहा गया था कि कल्पना जिस हुंडई क्रेटा कार से चलती थीं, उस पर उत्तराखंड सरकार का बोर्ड, हूटर और नीली-लाल बत्ती लगी थी। रेखा आर्य ने कल्पना और उनके कथित मौसा डॉ. आरसी पांडेय की गतिविधियों की निष्पक्ष जांच की मांग भी की थी।
बरेली के आवास से सात लाख रुपये और जेवर चोरी का आरोप
मामले में मंत्री की ओर से बरेली स्थित आवास से सात लाख रुपये और सोने से जड़ी रुद्राक्ष की माला चोरी होने का आरोप भी लगाया गया था। शिकायत के आधार पर बारादरी थाने में 9 सितंबर 2024 को तत्कालीन आईजी डॉ. राकेश सिंह के आदेश पर मुकदमा दर्ज किया गया था। हालांकि, शुरुआती जांच के बाद मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी गई थी। बाद में दोबारा पैरवी के बाद मामले की विवेचना कराई गई। इसके बाद कल्पना मिश्रा को 14 जुलाई 2026 को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। जेल जाने के बाद उनकी ओर से जमानत के लिए अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया था।
कल्पना के वकील ने कोर्ट में क्या दलील दी
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कल्पना मिश्रा की ओर से अधिवक्ता लवलेश पाठक ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष का कहना था कि गिरधारी लाल साहू ने कल्पना को अपने व्यापार में 25 हजार रुपये प्रतिमाह के वेतन पर प्रबंधक नियुक्त किया था। इसके समर्थन में 6 जुलाई 2022 का पंजीकृत अनुबंध पत्र भी अदालत में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने आरोप लगाया कि नौकरी के दौरान कल्पना का मानसिक, शारीरिक और आर्थिक शोषण किया गया तथा उनकी निजी रकम भी हड़प ली गई। बचाव पक्ष के अनुसार, जब कल्पना ने इस मामले में शिकायत करने की बात कही तो प्रभाव का इस्तेमाल कर उन्हें रंजिश के चलते मुकदमे में फंसा दिया गया।
मंत्री पक्ष ने जमानत का किया विरोध
वहीं मंत्री पक्ष की ओर से कल्पना की जमानत का विरोध किया गया। अभियोजन की ओर से कहा गया कि कल्पना ने तीन अलग-अलग बैनामों में रेखा आर्य के बरेली स्थित आवास का पता इस्तेमाल किया था। इन दस्तावेजों में 10.50 लाख, 12 लाख और 19 लाख रुपये के लेनदेन का उल्लेख होने की बात कही गई। मंत्री पक्ष ने अदालत के सामने यह आशंका भी जताई कि जमानत मिलने के बाद कल्पना साक्ष्यों और गवाहों को प्रभावित कर सकती हैं।
दस्तावेजों और केस की स्थिति को कोर्ट ने माना अहम
अदालत ने केस डायरी और दोनों पक्षों की दलीलों का अवलोकन किया। कोर्ट के सामने कल्पना के गिरधारी लाल साहू की प्रबंधक होने से संबंधित पंजीकृत अनुबंध भी पेश किया गया था।अदालत ने माना कि आधार कार्ड में पता बदला जा सकता है और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों में पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया होती है। अदालत के सामने पेश रिकॉर्ड में संबंधित दस्तावेजों को फर्जी साबित करने वाला स्पष्ट उल्लेख नहीं मिला। कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि मामला मजिस्ट्रेट न्यायालय से विचारणीय है और कल्पना की पूर्व दोषसिद्धि से संबंधित कोई रिपोर्ट अदालत के सामने पेश नहीं की गई थी। इन परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने कल्पना मिश्रा की जमानत स्वीकार कर ली और उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही सुनवाई के दौरान सहयोग करने और साक्ष्य या गवाहों को प्रभावित नहीं करने की शर्तों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
गिरधारी लाल साहू का नाम भी रहा है चर्चा में
गिरधारी लाल साहू उर्फ गिरधारी पप्पू का नाम बरेली के चर्चित जैन हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है। इस मामले में वह आरोपी रहे हैं। उन पर अदालत से फाइल गायब होने का आरोप भी लगा था। बाद में उच्च न्यायालय के आदेश पर जैन हत्याकांड की फाइल दोबारा तैयार की गई। बरेली में गिरधारी पप्पू लंबे समय से अलग-अलग मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनकी शादियों से लेकर साहू समाज के सम्मेलनों और बरेली की राजनीति में सक्रिय होने की कोशिशों तक उनका नाम सामने आता रहा है। उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न मुकदमे भी समय-समय पर पुलिस और अदालत की प्रक्रिया से गुजरते रहे हैं। फिलहाल कल्पना मिश्रा को अदालत से जमानत मिलने के बाद इस हाईप्रोफाइल मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।
