रामलीला मैदान के पास किराए के कमरे में चल रहा था नकली नोट छापने का खेल, पुलिस ने प्रिंटर और अन्य सामान भी किया बरामद
कानपुर: अपराधी अब ठगी और जालसाजी के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। कानपुर शहर में पुलिस ने ऐसे ही एक गिरोह का खुलासा किया है, जो किराए के कमरे में कथित तौर पर नकली नोट तैयार कर रहा था। कमरे में प्रिंटर के जरिए कागज पर नकली नोट तैयार किए जाते थे और बाद में इन्हें रेलवे स्टेशन के आसपास के बाजारों में खपाने की तैयारी थी। रेल बाजार पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 2 लाख 4 हजार 650 रुपये की नकली करेंसी बरामद की है।
रामलीला मैदान के पास कमरे में चल रहा था पूरा खेल
अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय संकल्प शर्मा ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि रेल बाजार थाना क्षेत्र में रामलीला मैदान के पास एक कमरा किराए पर लिया गया था। पुलिस को सूचना मिली थी कि इसी कमरे में नकली नोट तैयार किए जा रहे हैं। इसके बाद पुलिस टीम ने बताए गए ठिकाने पर छापा मारकर तलाशी ली। तलाशी के दौरान कमरे से नकली नोटों की खेप के साथ उन्हें तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद हुआ। पुलिस ने मौके से बांगरमऊ, उन्नाव के रघुवर खेड़ा निवासी 52 वर्षीय शेर सिंह, 24 वर्षीय रोशन अली और जालौन के उरई थाना क्षेत्र के गड़र बिनौर निवासी 36 वर्षीय सोमिल गुप्ता को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक शेर सिंह वर्तमान में चकेरी क्षेत्र में संजू पुलिया के पास किराए के कमरे में रह रहा था। पुलिस ने शेर सिंह को गिरोह का मुख्य आरोपी बताया है।
एक के बदले तीन नकली नोट देने का दावा
पुलिस पूछताछ में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि आरोपी नकली नोटों का सौदा ‘एक के बदले तीन’ के हिसाब से करते थे। यानी कोई व्यक्ति जितनी रकम देता था, उसके बदले उसे तीन गुना कीमत के नकली नोट दिए जाते थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह कम मूल्य वाले नोटों को बाजार में खपाने की कोशिश करता था। इसके लिए रेलवे स्टेशन के आसपास की छोटी दुकानों को निशाना बनाया जाता था। कानपुर सेंट्रल और आसपास के बाजारों में आने-जाने वाले यात्रियों के बीच भी नकली नोट चलाने की कोशिश की जाती थी।
100 रुपये के नकली नोटों की सबसे बड़ी खेप
पुलिस की छापेमारी में अलग-अलग मूल्य के नकली नोट बरामद हुए हैं। पुलिस के अनुसार, बरामद नकली करेंसी में 100 रुपये के 1991 नोट, 50 रुपये के 71 नोट और 500 रुपये के 4 नोट शामिल हैं। इन सभी नकली नोटों की कुल कीमत 2 लाख 4 हजार 650 रुपये बताई गई है। नकली करेंसी के अलावा पुलिस ने एक प्रिंटर, कैंची, दो कागज काटने वाले उपकरण, दो स्केल, चार खाली और पांच भरी हुई स्याही की बोतलें व डिब्बियां, एक रिम कागज, कपड़े, ट्रॉली बैग और अन्य उपकरण भी बरामद किए हैं।
सिर्फ नकली नोट नहीं, पूरा सामान मिला
पुलिस को कमरे से जिस तरह प्रिंटर, कागज, स्याही और नोट तैयार करने से जुड़े अन्य उपकरण मिले हैं, उससे माना जा रहा है कि वहां नकली करेंसी तैयार करने का पूरा इंतजाम किया गया था। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह गतिविधि कमरे में कितने समय से चल रही थी और शेर सिंह के अलावा इसमें और कौन-कौन लोग शामिल थे। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कमरे में तैयार किए गए नकली नोट किन लोगों तक पहुंचाए जाते थे और उन्हें बाजार में खपाने का काम कौन करता था।
तीनों आरोपियों का आपराधिक इतिहास भी खंगाल रही पुलिस
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों का पहले से आपराधिक इतिहास है। सोमिल गुप्ता पर पांच, रोशन अली पर सात और शेर सिंह पर चार आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए गए हैं। गिरोह के सदस्यों के पुराने आपराधिक मामलों और उनके संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को आशंका है कि नकली नोटों की गतिविधि केवल कानपुर तक सीमित नहीं रही होगी और इसके तार दूसरे इलाकों से भी जुड़े हो सकते हैं।
कहां-कहां पहुंची नकली करेंसी, अब इसकी जांच
तीनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी नकली करेंसी तैयार की और इनमें से कितने नोट बाजार में पहुंच चुके हैं। पुलिस कानपुर सेंट्रल के अलावा आसपास के रेलवे स्टेशनों और बाजारों में भी गिरोह के संपर्क तलाश रही है। साथ ही नकली नोट तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाले विशेष कागज, स्याही और अन्य सामान की आपूर्ति कहां से होती थी, इसका भी पता लगाया जा रहा है। पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। अब जांच कमरे में मिले नकली नोटों और उपकरणों से आगे बढ़कर उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने पर केंद्रित है, जिसके जरिए नकली करेंसी को बाजार में खपाया जा रहा था।
