सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण घोषित होने के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई, मस्जिद समिति की अपील भी खारिज; भारी पुलिस बल के बीच हुआ ध्वस्तीकरण
सहारनपुर: उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में शनिवार सुबह कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद को प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया। प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को सरकारी जमीन पर अवैध घोषित किया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद समिति की ओर से दाखिल अपील भी खारिज हो चुकी थी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। कार्रवाई को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस बल और आरआरएफ की तैनाती की गई थी। प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच कार्रवाई पूरी की।
सरकारी जमीन पर निर्माण का मामला
कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को लेकर विवाद की शुरुआत शिकायत के बाद हुई थी। बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में सार्वजनिक परिसर अधिनियम के तहत याचिका दाखिल की गई थी। 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद के निर्माण को अवैध करार देते हुए 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। इस आदेश के खिलाफ मस्जिद पक्ष ने 20 जुलाई 2026 को जिला जज की अदालत में अपील दाखिल की।
17 तारीखों की सुनवाई के बाद खारिज हुई अपील
जिला जज की अदालत में मामले की 17 तारीखों पर सुनवाई हुई। इसके बाद 2 सितंबर को अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की अपील खारिज कर दी। प्रशासन के अनुसार, न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद शनिवार सुबह मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई।
कार्रवाई से पहले बढ़ाई गई सुरक्षा
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को देखते हुए सहारनपुर में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी और आरआरएफ को तैनात किया गया। मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में लगातार पैदल गश्त और फ्लैग मार्च किया गया। सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह के अनुसार, नोटिस और अपील समेत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई। उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील करते हुए सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।
कैराना सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बीच कैराना सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि वह सहारनपुर जाने के लिए निकल रही थीं, इसी दौरान उनके आवास पर पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोक दिया गया। इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले को लेकर अधिकारियों से मिलना चाहती थीं और इलाके के लोगों की आवाज प्रशासन के सामने रखना चाहती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सहारनपुर जाने से रोकने के लिए उन्हें घर पर नजरबंद किया गया। सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का जनता से जुड़े मुद्दे पर अधिकारियों से मिलना अपराध है। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि जनता की आवाज उठाने के लिए चुने जाते हैं।
मायावती ने कार्रवाई रोकने की मांग की
सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण के मामले पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में मस्जिदों को अवैध बताकर ध्वस्त किए जाने के कथित अभियान पर सवाल उठाते हुए इसे तत्काल रोकने की मांग की। मायावती ने कहा कि सहारनपुर की मस्जिद सहित प्रदेश में मस्जिदों को जल्दबाजी में अवैध बताकर ध्वस्त करने का सरकारी अभियान उचित नहीं है। उन्होंने सरकार से ऐसे नकारात्मक हालात से बचने और समस्या के समाधान के दूसरे रास्ते तलाशने की अपील की।
धार्मिक स्थलों के सम्मान की बात
मायावती ने कहा कि संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष सरकार का दायित्व है कि सभी धर्मों को मानने वाले लोगों और उनके धार्मिक स्थलों का समान रूप से सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करे।उन्होंने कहा कि मस्जिदें इस्लाम धर्म में इबादत और सामूहिक नमाज के महत्वपूर्ण स्थल हैं और भारतीय परंपरा के अनुरूप धार्मिक स्थलों का सम्मान व्यापक जनहित में जरूरी है।
मकान गिराने की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल
मायावती ने आरोपियों के मकान गिराए जाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि नियम-कानून का उचित पालन किए बिना ऐसी कार्रवाई होती है तो उसका असर पूरे परिवार पर पड़ता है और लोग बेघर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए और सरकार तथा न्यायपालिका को इस दिशा में समुचित ध्यान देना चाहिए। सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद के ध्वस्तीकरण के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। प्रशासन जहां न्यायिक आदेश और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई किए जाने की बात कह रहा है, वहीं विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
