उत्तर प्रदेश में पशुपालन विभाग ने पशु क्रूरता रोकने के लिए जारी किए नए दिशा-निर्देश, दोपहर की तपती धूप में जानवरों से नहीं कराया जाएगा काम, हर पशु पर लदे वजन की सीमा तय
लखनऊ : यूपी के पशुपालन विभाग ने पशुओं के साथ होने वाली क्रूरता को रोकने के लिए एक अहम कदम उठाया है। पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत जारी किए गए नए दिशा-निर्देशों में न सिर्फ भार वहन की सीमाएं तय की गई हैं, बल्कि काम के घंटे और मौसम के अनुसार उनके उपयोग पर भी रोक लगाई गई है। पशुपालन विभाग के निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ. जयकेश कुमार पांडेय ने निर्देश में स्पष्ट किया है कि अब बैल, भैंसे, ऊंट, घोड़े, टट्टू और खच्चर जैसे जानवरों पर अधिकतम भार और कार्य समय की सीमा निर्धारित की गई है, ताकि इन निरीह जीवों का शोषण न हो।
कितना वजन उठाएंगे कौन से जानवर ?
पशुपालन विभाग के निर्देशों में अलग-अलग आकार और प्रजातियों के पशुओं के लिए वजन की सीमा तय की गई है। इसमें छोटा बैल/भैंसा (2 पहिया वाहन खींचने पर), हवा वाले टायर में 750 किलोग्राम, बिना हवा वाले टायर में 500 किलोग्राम, अन्य परिस्थितियों में 1000 किलोग्राम, मध्यम बैल/भैंसा पर अधिकतम भार 1400 से 700 किलोग्राम, बड़ा बैल/भैंसा पर अधिकतम भार 1350 से 900 किलोग्राम, घोड़ा या खच्चर में अधिकतम भार 750 से 500 किलोग्राम, टट्टू (पोनी) में अधिकतम भार 600 से 400 किलोग्राम, ऊंट पर अधिकतम भार 1000 किलोग्राम और गधा में अधिकतम भार 50 किलोग्राम तय किया गया है।
पशुओं के काम का समय भी तय
जानवरों की भलाई के लिए काम का समय भी तय किया गया है। जिसमें चलते यह नियम लागू होंगे। इसमें एक दिन में 9 घंटे से ज्यादा काम नहीं कराए जाएंगे। लगातार 5 घंटे से अधिक पशु से काम नहीं लिया जाएगा। दोपहर 12 से 3 बजे तक, जब तापमान 37°C से अधिक हो, तब जानवरों से कोई काम नहीं लिया जाएगा। नुकीली लकड़ियों या अन्य तीव्र उपकरणों का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा।
वाहनों में सवारी की सीमा भी तय
जो वाहन पशुओं द्वारा खींचे जाते हैं। उनमें चालक और 6 साल से कम उम्र के बच्चों को छोड़कर अधिकतम चार सवारी की अनुमति दी गई है। डॉ. पांडेय ने राज्य के सभी पशु चिकित्साधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इन नियमों का पालन सख्ती से कराया जाए। यदि कहीं भी पशु क्रूरता की जानकारी मिलती है, तो तुरंत नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
पशु कल्याण की दिशा में बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश सरकार का यह कदम पशु कल्याण की दिशा में अहम माना जा रहा है। गर्मी के मौसम में अक्सर पशुओं को अधिक वजन और लंबे समय तक खींचने के लिए मजबूर किया जाता रहा है। जिससे उनकी सेहत पर गंभीर असर पड़ता है। अब नए नियमों से उम्मीद है कि पशुओं को राहत मिलेगी और उनके साथ मानवीय व्यवहार सुनिश्चित किया जा सकेगा।
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