जीएसटी एसआईटी और कैंट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, नेपाल से फर्जी नाम पर चल रहा था नेटवर्क, 10 से अधिक संदिग्ध जांच के दायरे में, कई फर्जी फर्मों का खुलासा
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली में करोड़ों रुपये के फर्जी जीएसटी इनवॉइस और बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के बड़े सिंडिकेट का पर्दाफाश हुआ है।जीएसटी एसआईटी और थाना कैंट पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी लेनदेन से जुड़े नेटवर्क का खुलासा करते हुए मुख्य आरोपी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह का एक आरोपी नेपाल में छिपकर फर्जी पहचान के साथ पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के निर्देशन तथा एसपी क्राइम मनीष चंद्र सोनकर की निगरानी में की गई। इस कार्रवाई को अब तक की बड़ी जीएसटी धोखाधड़ी की कार्रवाई माना जा रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपी फरजान हाशमी वारदात के बाद नेपाल भाग गया था। यह वह ‘संदीप’ नाम से रहकर एक मोबाइल एप के जरिए अपने साथियों से संपर्क बनाए हुए था और पूरे नेटवर्क को निर्देश दे रहा था।
फर्जी कंपनियां बनाकर जारी किए जाते थे करोड़ों के बिल
पूछताछ और जांच में सामने आया कि गिरोह का कथित मास्टरमाइंड सागर अग्रवाल फर्जी फर्मों और लाभ लेने वाली कंपनियों के बीच मुख्य कड़ी का काम करता था। डीएम कंपाउंड के सामने स्थित एक कार्यालय से इस पूरे नेटवर्क का संचालन किया जा रहा था। आरोप है कि फर्जी आधार कार्ड और पैन कार्ड के जरिए कई कंपनियां बनाई गईं और बिना किसी वास्तविक माल की खरीद-बिक्री के करोड़ों रुपये के फर्जी जीएसटी बिल जारी कर बोगस इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ लिया गया।
100 करोड़ से अधिक का संदिग्ध लेनदेन
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए विभिन्न बैंक खातों में 100 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय लेनदेन किया गया। जांच के दौरान एफएस ट्रेडर्स, नाइट स्टार, आर्ट लाइफ हुडा, आर्ट लाइफ एसोसिएट, अरहम एग्रो फूड्स, सिद्धि विनायक एंटरप्राइज और मां एंटरप्राइज समेत कई फर्मों के नाम सामने आए हैं। इन सभी फर्मों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है।
मास्टरमाइंड समेत पांच आरोपी गिरफ्तार
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने सागर अग्रवाल, विनीत अरोरा, अनुज अग्रवाल और शिवम गुप्ता उर्फ लल्ला समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनके कब्जे से एक लैपटॉप, चार्जर, माउस तथा छह मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। पुलिस को उम्मीद है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नेटवर्क से जुड़े कई और अहम सुराग मिल सकते हैं।
10 से अधिक संदिग्ध जांच के घेरे में
पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआती चरण है। मामले में 10 से अधिक संदिग्धों की भूमिका की जांच की जा रही है। कई आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही फर्जी फर्मों, बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की गहराई से जांच की जा रही है।अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस फर्जी जीएसटी सिंडिकेट से जुड़े कई और बड़े खुलासे हो सकते हैं। करोड़ों रुपये के इस कथित टैक्स फ्रॉड में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
