बारिश में खेलते समय नाले में बहा था मासूम, रेस्क्यू में देरी पर मंत्री ने जताई नाराजगी; ईओ से स्पष्टीकरण, जेई के निलंबन और ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश
बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के आंवला कस्बे में बारिश के दौरान नाले में बह गए दिव्यांग मासूम प्रीत का शव आखिरकार तीन दिन बाद बरामद कर लिया गया। इस दर्दनाक हादसे के बाद लगातार चल रहे रेस्क्यू अभियान के बावजूद बच्चे का पता नहीं चल सका था। गुरुवार को प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह के मौके पर पहुंचने, अधिकारियों को फटकार लगाने और रेस्क्यू अभियान तेज करने के बाद बच्चे का शव नाले से बरामद हुआ। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है।
बारिश में खेलते समय पैर फिसला, नाले में बह गया था प्रीत
देहात के आंवला थाना क्षेत्र के खेड़ा मोहल्ले का रहने वाला करीब सात वर्षीय दिव्यांग प्रीत मंगलवार शाम बारिश के दौरान घर के पास खेल रहा था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और तेज बहाव वाले नाले में गिरकर बह गया। सूचना मिलते ही पुलिस, एसडीआरएफ और नगर पालिका की टीमें मौके पर पहुंचीं और लगातार रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तीन दिन तक सफलता नहीं मिली।
तीसरे दिन नाले से बरामद हुआ शव
शुक्रवार को सर्च अभियान के दौरान प्रीत का शव नाले से बरामद कर लिया गया। पुलिस ने शव का पंचायतनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए। मासूम की मौत से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
मंत्री धर्मपाल सिंह ने अफसरों को लगाई थी फटकार
शव मिलने से पहले गुरुवार को प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह पीड़ित परिवार से मिले और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने रेस्क्यू अभियान में देरी पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि तीन दिनों से रेस्क्यू ऑपरेशन के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही थी। मंत्री ने नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) से स्पष्टीकरण लेने, संबंधित अवर अभियंता (जेई) को निलंबित करने और लापरवाही बरतने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश दिए।
नालों पर सुरक्षा इंतजाम नहीं होने पर उठे सवाल
मंत्री ने अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक में कहा कि यदि नालों पर सुरक्षा जाल लगाए गए होते तो यह हादसा टाला जा सकता था। उन्होंने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक किलोमीटर लंबे नाले में तीन दिन तक बच्चे का पता नहीं लग पाना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने डॉग स्क्वायड सहित सभी उपलब्ध संसाधनों का उपयोग कर रेस्क्यू तेज करने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
60 कर्मचारी लगे रहे, फिर भी नहीं मिली थी सफलता
रेस्क्यू अभियान में नगर पालिका के करीब 60 कर्मचारियों के अलावा पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें लगातार जुटी रहीं। इसके बावजूद शुरुआती तीन दिनों तक बच्चे का पता नहीं चल सका, जिससे स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती गई। अब शव मिलने के बाद पुलिस ने आगे की विधिक कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि प्रशासन ने मामले में जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
