बहेड़ी के गन्ना उत्पादक पीजी कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर बोले- छात्रों के हक की आवाज उठाने की मिली सजा, बिना नोटिस और जांच सेवा समाप्त करने का आरोप
बरेली : यूपी के बरेली देहात के बहेड़ी स्थित गन्ना उत्पादक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर (कॉमर्स) डॉ. मोहित भारद्वाज की बर्खास्तगी का मामला अब राजनीतिक रंग लेता नजर आ रहा है। छात्रों के मुद्दों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित आंदोलन में शामिल होने के बाद सेवा से हटाए जाने के उनके आरोपों के बीच बुधवार को सीजेपी (काॅकरोच जनता पार्टी) भी उनके समर्थन में उतर आई। पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर डॉ. मोहित को हरसंभव विधिक सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
डॉ.मोहित ने ये लगाएं आरोप
डॉ. मोहित भारद्वाज का आरोप है कि उन्होंने छात्रों की समस्याओं, प्रतियोगी परीक्षाओं, रोजगार और शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक तरीके से उठाने के लिए जंतर-मंतर आंदोलन में हिस्सा लिया था। उनका कहना है कि इसी वजह से उन्हें दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधात्मक कार्रवाई का शिकार बनाया गया तथा बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए सेवा से निष्कासित कर दिया गया।
महाविद्यालय प्रबंधन ने नहीं दिया नोटिस
डॉ. भारद्वाज ने दावा किया कि महाविद्यालय प्रबंधन ने उन्हें बर्खास्त करने से पहले न तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया, न विभागीय जांच कराई और न ही अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। उनका कहना है कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों की अनदेखी करते हुए उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस मामले को लेकर उन्होंने डीएम से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक और वैचारिक दुर्भावना से प्रेरित है।उन्होंने कहा कि वह समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष हैं।
गन्ना समिति के माध्यम से महाविद्याल का संचालन
इस महाविद्यालय का संचालन गन्ना समिति के माध्यम से होता है, जिसके अध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं। इसी वजह से इस पूरे प्रकरण को लेकर भाजपा और सपा के बीच राजनीतिक चर्चा भी तेज हो गई है। दूसरी ओर, महाविद्यालय प्रबंधन की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में डॉ. मोहित द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। फिलहाल यह मामला शिक्षण संस्थानों, छात्र संगठनों और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। डीएम स्तर पर शिकायत पर होने वाली कार्रवाई और महाविद्यालय प्रबंधन के पक्ष पर सभी की नजरें टिकी हैं।
