दरगाह आला हज़रत में 46वां एक रोज़ा उर्स-ए-नूरी संपन्न, देश-विदेश से पहुंचे हजारों जायरीन, अमन, तरक्की और खुशहाली के लिए की गई खास दुआ
बरेली : दरगाह आला हज़रत में सोमवार को आला हज़रत के छोटे साहिबज़ादे और सुन्नी बरेलवी परंपरा के प्रमुख धर्मगुरु मुफ्ती -ए-आज़म हिंद हज़रत अल्लामा मुस्तफा रज़ा खान कादरी नूरी का 46वां एक रोज़ा उर्स-ए-नूरी अदब और अकीदत के साथ मनाया गया। उर्स में देश-विदेश से हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। गुलपोशी और फातिहाख्वानी के बाद मुल्क में अमन, भाईचारे, तरक्की और खुशहाली के लिए विशेष दुआ की गई। कार्यक्रम दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी (अहसन मियां) की सदारत और सैय्यद आसिफ मियां की देखरेख में संपन्न हुआ। देर रात 1:40 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई।
मुल्क के बंटवारे के खिलाफ थे मुफ्ती-ए-आज़म हिंद
उर्स के दौरान अपने संबोधन में सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा कादरी (अहसन मियां) ने कहा कि मुफ्ती-ए-आज़म हिंद ने अपनी पूरी जिंदगी दीन और मिल्लत की खिदमत में गुजारी। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 में देश के विभाजन के समय मुफ्ती-ए-आज़म हिंद ने पाकिस्तान जाने के बजाय भारत में रहना पसंद किया और वह मुल्क के बंटवारे के खिलाफ थे। उन्होंने देशभर की सुन्नी खानकाहों को एक सूत्र में जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
दीन के साथ समाज सुधार पर भी दिया जोर
मदरसा मंज़र-ए-इस्लाम के सदर मुफ्ती अकिल रज़वी की मौजूदगी में मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी ने मुफ्ती-ए-आज़म हिंद के धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने वालिद आला हज़रत के मिशन को आगे बढ़ाते हुए दीन की खिदमत के साथ समाज सुधार के कार्यों को भी प्राथमिकता दी। वक्ताओं ने उन्हें फिक्ह, परहेजगारी और इल्म की बुलंद शख्सियत बताया।
मिलाद, नात और मनकबत से गूंजा दरगाह परिसर
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि फज्र की नमाज के बाद कुरानख्वानी से कार्यक्रम की शुरुआत हुई। मगरिब के बाद हाजी गुलाम सुब्हानी ने मिलाद का नजराना पेश किया, जबकि रात 10 बजे तिलावत-ए-कुरान के साथ महफिल शुरू हुई। देशभर से आए उलेमा और शोअरा ने तकरीरें कीं तथा नात और मनकबत पेश कीं। देर रात कुल शरीफ के बाद खुसूसी दुआ के साथ उर्स का समापन हुआ।
बड़ी संख्या में मौजूद रहे उलेमा और अकीदतमंद
उर्स में मुस्तअहसन रज़ा खान, सैय्यद मुस्तफा मियां, राशिद अली खान, सैय्यद अनवारुल सादात, जुबैर रज़ा खान, शाहिद खान नूरी, नासिर कुरैशी, अजमल नूरी, ताहिर अल्वी, परवेज़ नूरी, हाजी जावेद खान समेत बड़ी संख्या में उलेमा, खानकाही जिम्मेदार और अकीदतमंद मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में देश में अमन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ की गई।
