कोलकाता : रविवार का दिन ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा झटका लेकर आया। पार्टी के वरिष्ठ और दिग्गज सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने अब खुलकर बगावत का रास्ता अपना लिया है। उन्होंने औपचारिक रूप से पार्टी के बागी खेमे का साथ दे दिया है। उनके इस कदम से टीएमसी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गई है।
जानकारी के अनुसार, बागी गुट का उद्देश्य अब पार्टी के संसदीय दल पर अपना नियंत्रण स्थापित करना है। बागी नेताओं का मानना है कि पार्टी के नेतृत्व और संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की जरूरत है। वे चाहते हैं कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पार्टी में केवल एक सलाहकार या मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं, जबकि संसदीय और संगठनात्मक फैसले सामूहिक नेतृत्व के आधार पर लिए जाएं। बागी गुट ने दावा किया है कि जल्द ही दो और सांसद उनके साथ जुड़ने वाले हैं। यदि ऐसा होता है तो लोकसभा में बागी सांसदों की संख्या बढ़कर 22 हो जाएगी। इससे टीएमसी के संसदीय दल के भीतर शक्ति संतुलन पर बड़ा असर पड़ सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने लगा था। चुनावी हार के बाद कई नेताओं और सांसदों ने संगठन की कार्यशैली और नेतृत्व को लेकर सवाल उठाए थे। हालांकि उस समय पार्टी नेतृत्व ने एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की थी, लेकिन अब हालात अलग दिखाई दे रहे हैं।
बताया जा रहा है कि बागी सांसदों का समूह सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात करेगा। इस मुलाकात में वे संसद के भीतर एक अलग गुट के रूप में अपनी पहचान और मान्यता की मांग रख सकते हैं। यदि उन्हें अलग गुट के रूप में मान्यता मिलती है तो यह तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। सुदीप बंदोपाध्याय लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के सबसे प्रभावशाली नेताओं में शामिल रहे हैं। वे दिल्ली में पार्टी की आवाज माने जाते रहे हैं और वर्ष 2011 से 2025 तक लोकसभा में टीएमसी के नेता की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। संसद के भीतर पार्टी की रणनीति तय करने और राष्ट्रीय स्तर पर उसकी मौजूदगी मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
उनके बागी खेमे में शामिल होने से पार्टी के भीतर राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदलते नजर आ रहे हैं। सुदीप बंदोपाध्याय ने अपने फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि पार्टी के कई सांसद और विधायक चाहते हैं कि ममता बनर्जी केवल मार्गदर्शक की भूमिका में रहें। उन्होंने कहा कि इसी भावना का सम्मान करते हुए वह बागी सांसदों के साथ आए हैं। उनका यह बयान बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। अब सभी की नजरें सोमवार को होने वाली गतिविधियों और लोकसभा अध्यक्ष से बागी सांसदों की संभावित मुलाकात पर टिकी हैं।
फिलहाल तृणमूल कांग्रेस के भीतर बढ़ती यह बगावत पश्चिम बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गई है और इससे ममता बनर्जी के नेतृत्व के सामने नई चुनौती खड़ी होती दिखाई दे रही है।
