नई दिल्ली : कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कांग्रेस में संभावित विलय की चर्चाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी की कांग्रेस नेतृत्व से हुई मुलाकातों को लेकर जो अटकलें लगाई जा रही हैं, उनका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। वेणुगोपाल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह केवल अफवाह है और कांग्रेस या टीएमसी के बीच विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई है।
दरअसल, पिछले कुछ दिनों से राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज थी कि तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर कांग्रेस के साथ औपचारिक रूप से जुड़ सकती है। इन अटकलों को तब और बल मिला जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने नई दिल्ली में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की। इसके अगले ही दिन टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से वन-टू-वन मुलाकात की। लगातार दो दिनों में हुई इन महत्वपूर्ण बैठकों के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और मीडिया के एक वर्ग ने दोनों दलों के बीच किसी बड़े राजनीतिक समझौते या विलय की संभावना जतानी शुरू कर दी थी।
हालांकि, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने इन सभी कयासों पर विराम लगाते हुए कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की मुलाकातें पूरी तरह सामान्य और शिष्टाचार आधारित थीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के नेताओं के बीच इस प्रकार की मुलाकातें लोकतंत्र का सामान्य हिस्सा हैं और इन्हें किसी अन्य संदर्भ में नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य इंडिया गठबंधन को और अधिक मजबूत बनाना था ताकि केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता को मजबूती दी जा सके।
वेणुगोपाल ने कहा कि वर्तमान समय में देश के सामने कई गंभीर चुनौतियां हैं और विपक्षी दलों का प्रयास है कि वे जनता के मुद्दों को मजबूती से उठाएं। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन के सभी घटक दल इस बात पर सहमत हैं कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और जनता के हितों के लिए मिलकर काम किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र की मौजूदा सरकार के खिलाफ संघर्ष को और प्रभावी बनाने के लिए विपक्षी दल लगातार आपसी संवाद बनाए हुए हैं।
इस अवसर पर कांग्रेस ने अगले तीन महीनों के लिए एक बड़े राष्ट्रव्यापी अभियान की भी घोषणा की। पार्टी का कहना है कि वह देशभर में जनसंपर्क और जनआंदोलन के माध्यम से जनता के मुद्दों को उठाएगी। कांग्रेस नेतृत्व के अनुसार महंगाई, बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, सामाजिक असमानता और विदेश नीति जैसे मुद्दे वर्तमान समय में देश की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल हैं और इन्हीं विषयों को लेकर पार्टी व्यापक स्तर पर आंदोलन करेगी।
केसी वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस का प्रत्येक नेता और कार्यकर्ता इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेगा। उन्होंने कहा कि पार्टी का उद्देश्य जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना और सरकार की नीतियों के खिलाफ जनमत तैयार करना है। कांग्रेस का मानना है कि बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी ने आम लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, जबकि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने युवाओं में निराशा पैदा की है। पार्टी इन सभी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है।
इस दौरान कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन रद्द होने के मामले पर भी वेणुगोपाल ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ किसी भी प्रकार का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। न तो उनके खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज है, न कोई चार्जशीट दाखिल हुई है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई आरोप तय किया है। उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द होने का कारण केवल यह था कि उन्होंने अदालत की ओर से भेजे गए एक नोटिस का खुलासा अपने नामांकन पत्र में नहीं किया था।
वेणुगोपाल ने कहा कि इस एक तकनीकी कारण के आधार पर उनका नामांकन निरस्त कर दिया गया, जबकि उनके खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है। कांग्रेस का मानना है कि इस मामले को अनावश्यक रूप से राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है।
कुल मिलाकर कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस के साथ किसी भी प्रकार के विलय की चर्चा नहीं हुई है और न ही ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन है। पार्टी का पूरा ध्यान इंडिया गठबंधन को मजबूत करने, विपक्षी एकता बनाए रखने और जनहित के मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक संघर्ष को तेज करने पर केंद्रित है। आने वाले महीनों में कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी अभियान पर राजनीतिक दलों और जनता की नजरें बनी रहेंगी, क्योंकि यह अभियान आगामी राजनीतिक समीकरणों और विपक्ष की रणनीति को भी प्रभावित कर सकता है।
