थाईलैंड में 5-स्टार होटल का झांसा,।फिर ट्रक-नदी के रास्ते म्यांमार… ऐसे बनाया गया बंधक
बरेली : यूपी के बरेली से सामने आई यह खबर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध की उस खौफनाक सच्चाई को उजागर करती है। जिसमें भारत के युवाओं को विदेश में नौकरी का लालच देकर ‘साइबर गुलामी’ में धकेला जा रहा है। म्यांमार में साइबर ठगी के नेटवर्क के चंगुल में फंसे बरेली के चार युवाओं को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सुरक्षित वापस भारत लाया है। सभी युवाओं को उनके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
ऐसे फंसाया गया बरेली के युवाओं को
पीड़ित युवाओं से पूछताछ में सामने आया कि ठगों ने पहले उन्हें थाईलैंड में 70 से 80 हजार रुपये महीने की सैलरी और आईटी/ऑनलाइन जॉब का झांसा दिया। थाईलैंड पहुंचने के बाद उन्हें कुछ दिन 5-स्टार होटल में ठहराया गया, जिससे किसी को शक न हो। इसके बाद साजिश के तहत युवाओं को पहले ट्रक से और फिर नदी के रास्ते चोरी-छिपे म्यांमार पहुंचा दिया गया।
म्यांमार पहुंचते ही छीने गए पासपोर्ट-वीजा
पीड़ितों ने बताया कि म्यांमार पहुंचते ही वहां मौजूद वहां के नागरिकों ने उनके पासपोर्ट, वीजा और दस्तावेज छीन लिए और उन्हें बंधक बना लिया गया। बाहर निकलने या संपर्क करने की कोई आज़ादी नहीं थी। पहले कुछ दिनों तक उन्हें ट्रेनिंग दी गई और बाद में जबरन साइबर ठगी का काम कराया जाने लगा।
फेसबुक पर फर्जी लड़कियों की आईडी बनवाकर ठगी
युवाओं को आदेश दिया गया कि वे।फेसबुक पर भारतीय लड़कियों के नाम से फर्जी आईडी बनाएं। भारत के लोगों से दोस्ती करें, जैसे ही कोई शिकार फंसे, उसकी आईडी और पासवर्ड सीनियर को सौंप दें। इसके बाद पीड़ितों को ब्लैकमेल कर पैसे निकलवाने का पूरा काम वहां बैठे सीनियर साइबर ठग करते थे। काम से इनकार करने पर मारपीट और मानसिक प्रताड़ना भी की जाती थी।
खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई से मिली आज़ादी
भारतीय खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई कार्रवाई के बाद इन चारों युवाओं को साइबर ठगों के चंगुल से छुड़ाया गया और सुरक्षित भारत लाया गया। फिलहाल सभी युवा अपने घरों पर सुरक्षित हैं। मामले की स्थानीय स्तर पर जांच साइबर थाना पुलिस को सौंपी गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भारत में बैठा कौन सा नेटवर्क युवाओं को इस जाल में फंसा रहा है।
जानें पुलिस ने क्या की अपील
पुलिस और प्रशासन ने युवाओं से अपील की है कि विदेश में नौकरी के नाम पर आने वाले ऑनलाइन ऑफर से सावधान रहें। बिना वेरिफिकेशन किसी एजेंट या लिंक पर भरोसा न करें। संदिग्ध मामलों की सूचना तुरंत साइबर सेल या पुलिस को दें।
