बरेली:सूफीटोला इलाके में ऐवान-ए-फरहत शादी हॉल और गुड़ मैरिज हॉल पर चल रही ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए एक सप्ताह की रोक लगा दी। कोर्ट के आदेश मिलते ही मौके पर मौजूद बीडीए की टीम और बुल्डोज़र वापस लौट गए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
फरहत जनन एवं अन्य की ओर से दायर अनुच्छेद 32 की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने कहा कि यह मुद्दा सीधे अनुच्छेद 32 के तहत नहीं सुना जा सकता। अदालत ने याचिकाकर्ता को अनुच्छेद 226 के तहत हाई कोर्ट जाने की अनुमति देते हुए कहा कि जरूरत हो तो वे तत्काल सुनवाई का अनुरोध कर सकते हैं। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम सुरक्षा हाई कोर्ट की स्वतंत्र सुनवाई को प्रभावित नहीं करेगी।
बीडीए की कार्रवाई पर एक हफ्ते की रोक
बरेली विकास प्राधिकरण इन दोनों बारातघरों पर कथित अवैध निर्माण और अनियमितताओं के आधार पर ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया चला रहा था। लगातार दो दिनों की कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद पूरी प्रक्रिया फिलहाल थम गई है।
10 दिसंबर तक कोई नई कार्रवाई नहीं
अदालत ने साफ निर्देश दिया है कि अगले एक सप्ताह तक दोनों पक्ष यथास्थिति बनाए रखें। इसका मतलब है कि 10 दिसंबर 2025 तक बीडीए किसी भी अतिरिक्त कदम या विध्वंस की कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
अधिवक्ताओं ने रखा कोर्ट में पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रऊफ रहीम, एओआर वसीम अख्तर खान सहित अन्य अधिवक्ताओं ने अदालत में अपना पक्ष पेश किया। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने याचिका और लंबित आवेदनों का निस्तारण कर दिया।
