संजीव मेहरोत्रा
महामंत्री, बरेली ट्रेड यूनियंस
हर साल 15 मार्च को पूरी दुनिया में विश्व उपभोक्ता दिवस (World Consumer Rights Day) मनाया जाता है। यह दिन उपभोक्ताओं के अधिकारों, उनकी सुरक्षा और जागरूकता को मजबूत करने के उद्देश्य से समर्पित है। इस दिवस की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि वर्ष 1962 से जुड़ी है, जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी (John F. Kennedy) ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित करते हुए पहली बार उपभोक्ताओं के अधिकारों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया था।उन्होंने कहा था कि “उपभोक्ता अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा समूह है, जो लगभग हर आर्थिक निर्णय को प्रभावित करता है, लेकिन फिर भी उसकी आवाज अक्सर अनसुनी रह जाती है।”इसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 1983 से हर साल 15 मार्च को विश्व स्तर पर उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य यह है कि बाजार व्यवस्था में उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो और उनकी आवाज को मजबूती मिले।
ऑनलाइन बाजार के दौर में उपभोक्ता अधिकारों की बढ़ती अहमियत
बदलते बाजार में नई चुनौतियां आज का बाजार पहले की तुलना में पूरी तरह बदल चुका है। डिजिटल युग में उपभोक्ताओं के सामने कई नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इस वर्ष की थीम “सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता” (Safe Products,।Confident Consumers) है, जो वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता को दर्शाती है। आज बाजार में वस्तुओं और सेवाओं के विकल्पों की लंबी श्रृंखला मौजूद है।
फेक रिव्यू और भ्रामक विज्ञापनों का दौर
कंपनियां आकर्षक विज्ञापनों और कम कीमत के वादों के जरिए ग्राहकों को लुभाने की कोशिश करती हैं। लेकिन इन सबके बीच उपभोक्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती सही और सुरक्षित उत्पाद की पहचान करना है। आज उपभोक्ता सिर्फ दुकानों तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेट और ई-कॉमर्स के दौर में खरीदारी का तरीका पूरी तरह बदल गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घर बैठे हजारों उत्पाद उपलब्ध हैं, लेकिन इसके साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। कई बार ग्राहकों को फेक रिव्यू, भ्रामक विज्ञापन और झूठे ऑफर्स के जरिए गुमराह किया जाता है। कुछ वेबसाइटें और प्लेटफॉर्म उत्पादों की झूठी समीक्षाएं देकर उपभोक्ताओं को भ्रमित करते हैं, जिससे ग्राहक गलत या निम्न गुणवत्ता वाले उत्पाद खरीद लेते हैं। उपभोक्ता संरक्षण कानून ने दी नई ताकत
अधिकारों की जागरूकता से ही बनेगा भरोसेमंद बाजार
भारत में उपभोक्ताओं को मजबूत बनाने के लिए Consumer Protection Act 2019 लागू किया गया। जिसने ऑनलाइन बाजार यानी ई-कॉमर्स को भी अपने दायरे में शामिल किया। इस कानून के तहत भ्रामक विज्ञापन देने वाली कंपनियों और प्रचार करने वाली हस्तियों पर भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इस अधिनियम के तहत उपभोक्ताओं को चार महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं। इसमें सुरक्षा का अधिकार,सूचना का अधिकार, चयन का अधिकार, सुनवाई का अधिकार हैं। इन अधिकारों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ता सुरक्षित उत्पाद खरीद सके, सही जानकारी प्राप्त कर सके और किसी भी समस्या की स्थिति में अपनी शिकायत दर्ज करा सके।
जागरूक ग्राहक ही मजबूत बाजार की नींव
आज के समय में सिर्फ कानून होना ही काफी नहीं है, बल्कि उपभोक्ताओं का जागरूक होना भी बेहद जरूरी है। ग्राहकों को खरीदारी करते समय बिल अवश्य लेना चाहिए और उत्पाद पर आईएसआई, एगमार्क जैसे गुणवत्ता मानकों की जांच करनी चाहिए। साथ ही उत्पाद की एक्सपायरी डेट और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। अगर किसी उपभोक्ता को किसी प्रकार की समस्या होती है, तो उसे शिकायत दर्ज कराने के लिए इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। वह घर बैठे नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है।
ग्राहकों की आवाज को मजबूत बनाने का संदेश
विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस का असली उद्देश्य यही है कि उपभोक्ता अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो और किसी भी प्रकार की।धोखाधड़ी या भ्रामक व्यापार के खिलाफ आवाज उठाने से पीछे न हटे। आज जरूरत इस बात की है कि बाजार में सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध हों और उपभोक्ता पूरी तरह आश्वस्त महसूस करें। जब ग्राहक जागरूक होंगे और अपने अधिकारों का उपयोग करेंगे, तभी एक निष्पक्ष और पारदर्शी बाजार व्यवस्था विकसित हो सकेगी।
