सपा प्रमुख ने कहा-3 महीने बढ़े समय सीमा, नहीं तो मताधिकार पर संकट
लखनऊ : समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने यूपी में चल रही Special Summary Revision (SSR/ SIR) प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह व्यवस्था आम लोगों के लिए मुसीबत बन गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ने “व्यवहारिक मांगों” की अनदेखी की और अब स्थिति ऐसी है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी तथा लाखों मतदाताओं के नाम कटने का खतरा बढ़ गया है।
“16 करोड़ मतदाताओं का एक महीने में सत्यापन संभव नहीं”: अखिलेश यादव
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में एक महीने के भीतर 16 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन करना असंभव है। उन्होंने कहा कि बीएलओ पर अत्यधिक दबाव है, जिससे उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति पर गंभीर असर हो रहा है।
सपा ने 3 महीने बढ़ाने की मांग की, लेकिन आयोग ने सिर्फ 7 दिन बढ़ाए
सपा अध्यक्ष ने कहा- निर्वाचन आयोग ने 4 से 11 दिसंबर तक समय बढ़ाकर कोई मदद नहीं की। हमने 3 महीने बढ़ाने की मांग की थी, उसकी अनदेखी हुई। आयोग संवेदनहीन हो चुका है।”उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग को मतदाताओं की परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं है।
“आयोग की पारदर्शिता पर सवाल, कहीं भाजपा के इशारे पर वोट काटने की साजिश तो नहीं?”
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में एसआईआर के दौरान लाखों लोग मताधिकार से वंचित हुए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा ही खतरा उत्तप्रदेश में भी दिख रहा है, और यह आशंका बढ़ती है कि चुनाव से पहले विपक्षी वोटरों को निशाना बनाने की रणनीति चल रही है। “क्या आयोग को अब अपनी साख और चुनाव की पारदर्शिता की परवाह नहीं? संदेह यही होता है कि भाजपा सरकार के इशारे पर काम हो रहा है।”
बीएलओ पर दबाव, धमकी और मौतें, 6 से ज्यादा बीएलओ की मौत
पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने चिंता जताई कि कम समय में अत्यधिक काम है। ऊपर से नौकरी की धमकियाँ, अवसाद की स्थिति इन सबके कारण आधा दर्जन से अधिक बीएलओ की मौत हो चुकी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर मृत बीएलओ को सेवामुक्त दिखाने की साजिश हो रही है, ताकि उनके परिवारों को सरकारी सहायता न मिले।
सफाई कर्मचारी को सहायक बनाकर क्या सुधार होगा?
पूर्व सीएम अखिलेश ने कहा कि SIR एक बेहद तकनीकी और महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, और इसमें गलती होने पर नागरिकों को वोट का अधिकार, नागरिकता से जुड़े अधिकार, आरक्षण,कई संवैधानिक सुविधाएँ से वंचित होने का खतरा है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी को बीएलओ के सहायक के रूप में नियुक्त करने से कोई वास्तविक समाधान नहीं मिलता।
यदि आयोग ईमानदार है, तो समय सीमा कम से कम 3 महीने बढ़ाए
सपा अखिलेश यादव ने मांग की कि “अगर निर्वाचन आयोग ईमानदारी और निष्पक्षता से काम करना चाहता है तो SIR की समयसीमा कम से कम 3 महीने होनी चाहिए।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मतदाताओं को उनके अधिकार से वंचित किया गया, तो आरोप सीधे चुनाव आयोग पर ही लगेंगे।
