भारत के समाजवादी आंदोलन की धारा में पन्नालाल सुराणा सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि एक आदर्श, एक मार्गदर्शक और एक जीवित प्रेरणा रहे हैं। उनका जीवन बताता है कि समाजवादी होना सिर्फ विचारधारा नहीं, बल्कि हर पल जी जाने वाली साधना है।
पहली मुलाकात से जीवनभर का मार्गदर्शन
मेरी पन्नालाल सुराणा जी से पहली मुलाकात वरिष्ठ समाजवादी चिंतक सुरेंद्र मोहन जी के साथ हुई। 1985 में जब मैंने बैतूल में कार्य शुरू किया, तभी से सुराणा जी, वीणा ताई, भाई वैद्य जी और पारिट गुरुजी लगातार बैतूल आते-जाते रहे। राष्ट्र सेवा दल (RSD) की गतिविधियों में मुझे सक्रिय रखने वाले ये पांचों स्तंभ आज हमारे बीच नहीं हैं,लेकिन उनकी दी गई सीख आज भी आंदोलन को दिशा देती है।
राष्ट्र सेवा दल का विस्तार, उनकी दृष्टि, हमारी ऊर्जा
मध्यप्रदेश में ग्वालियर, सांची, बेगमगंज, मुलताई और छिंदवाड़ा में लगातार दो दशक तक RSD शिविर आयोजित करने का श्रेय सुराणा जी की प्रतिबद्धता को जाता है। उन्होंने ही मुझे मध्य प्रदेश राष्ट्र सेवा दल का अध्यक्ष बनाया और पूरे प्रदेश में संगठन को जीवंत रखने की जिम्मेदारी सौंपी।
90 वर्ष की उम्र में भी कर्मयोग का सिलसिला नहीं टूटा

पन्नालाल जी देशभर में समाजवादी कार्यकर्ताओं से संवाद करने, संगठन को खड़ा करने और युवा पीढ़ी में समाजवादी मूल्यों का संचार करने के लिए लगातार दौरे करते रहे। पूर्वोत्तर से लेकर कश्मीर, और उत्तर से दक्षिण तक, वे बिना थके, बिना रुके काम करते रहे,जब तक कि उनके पैर अत्यधिक सूज न गए।
सम्मेलन की तैयारी, बीमारी के बीच भी समर्पण
समाजवादी आंदोलन के 90 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पुणे सम्मेलन में उनकी अध्यक्षता तय थी। जब यह कार्यक्रम 17 मई,2025 को होना था। वे सात दिन पहले पुणे पहुंचकर तैयारी में लग गए थे। युद्ध जैसी परिस्थिति के कारण सम्मेलन स्थगित हुआ, लेकिन उनका उत्साह नहीं। इस बार उन्हें पंडित रामकिशन जी के साथ सम्मानित भी किया जाना था, पर स्वास्थ्य कारणों से पहुंच न सके।
समाजवादी समागम, उनके विचार ने दी दिशा
2014 के समाजवादी समागम का प्रस्ताव भी सुराणा जी ने ही प्रो. आनंद कुमार और मेधा पाटकर जी के साथ मिलकर तैयार किया था।उन्होंने ही आग्रह कर मुझे राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दिलाई उनका यह विश्वास मेरे लिए आजीवन प्रेरणा है।
सिद्धांतों पर अडिग, डॉ. लोहिया के ‘जेल, वोट, फावड़ा’ को जिया

सुराणा जी ने डॉ. लोहिया के तीन मूल मंत्रों को अपने जीवन में उतारा।।इसमें सामाजिक न्याय और समानता के लिए संघर्ष (‘जेल’), लोकतांत्रिक राजनीति में नैतिक भागीदारी (‘वोट’), श्रम के महत्व को जीवन का आधार बनाना (‘फावड़ा’), आपातकाल के 18 महीनों तक वे जेल में रहे। सैकड़ों शिक्षा संस्थानों और जनसंगठनों से जुड़े रहकर आजीवन लोक शिक्षण का कार्य किया।
देहदान, समाजवादी जीवन का अंतिम संदेश
मधु दंडवते जी और डॉ. जी जी परीख की तरह पन्नालाल सुराणा जी ने भी देहदान किया। कर्मयोग और मानवता की सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए।
एक समाजवादी को कैसा जीवन जीना चाहिए?
पन्नालाल सुराणा का जीवन ईमानदारी, सरलता, पारदर्शिता, संघर्ष, जनसेवा, नैतिकता,और सबसे बढ़कर संगठन व साथियों के प्रति प्रेम और विश्वास। वे चले गए, लेकिन उनके जीवन की रोशनी समाजवादी आंदोलन के लिए हमेशा मार्गदर्शन करती रहेगी।
इंटरनेशनल सॉलिडैरिटी डे पर IPSF का कार्यक्रम

नई दिल्ली में इंटरनेशनल सॉलिडैरिटी डे फॉर फिलिस्तीन पर इंडिया फिलिस्तीन सॉलिडैरिटी फ़ोरम (IPSF) ने बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में फिलिस्तीन के राजदूत अब्दुल्ला एम. अबू शवेश, कई देशों के राजदूत, सामाजिक कार्यकर्ता और जन आंदोलनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और UN महासचिव एंतोनियो गुटेरेस के संदेश पढ़े गए। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि भारत फिलिस्तीन के न्यायपूर्ण संघर्ष के साथ खड़ा है।IPSF ने गाजा और वेस्ट बैंक में हिंसा, नागरिकों और अस्पतालों पर हमलों की कड़ी निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इज़राइल पर प्रतिबंध और युद्ध अपराधों की जवाबदेही तय करने की मांग की। फोरम ने भारतीय नागरिक समाज से BDS आंदोलन को मजबूत करने की अपील की और कहा “भविष्य स्वतंत्रता का है, भविष्य मुक्त फिलिस्तीन का है।”
