लखनऊ : लखनऊ में शुक्रवार को राजधानी के विकास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परियोजना का लोकार्पण किया गया। शहर में बनाए गए 57 किलोमीटर लंबे ग्रीन कॉरिडोर का उद्घाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर झूलेलाल पार्क में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि और भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान दोनों नेताओं ने इस परियोजना को लखनऊ की जनता को समर्पित किया और इसे शहर के भविष्य के विकास के लिए अहम बताया।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में विकास की गति तेज हुई है और लखनऊ भी इस बदलाव का प्रमुख उदाहरण बनकर सामने आया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि आज लोग उन्हें बुलडोजर बाबा के नाम से जानते हैं और उनके नेतृत्व में प्रदेश में माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि बुलडोजर सिर्फ अवैध निर्माण को हटाने का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह नए विकास की जमीन तैयार करने का भी काम करता है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले समय में लखनऊ और कानपुर के बीच आवागमन और भी आसान होने वाला है। उन्होंने बताया कि लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का काम अंतिम चरण में है और इस महीने के अंत या अप्रैल की शुरुआत तक इसे शुरू कर दिया जाएगा। इसके शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच की दूरी महज 35 से 45 मिनट में तय की जा सकेगी। इससे न केवल लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी बल्कि व्यापार और उद्योग को भी नई गति मिलेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि लखनऊ अब केवल प्रशासनिक या राजनीतिक केंद्र ही नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राजनाथ सिंह ने बताया कि ब्रह्मोस मिसाइल से जुड़ी टेस्टिंग और इंटीग्रेशन फैसिलिटी का काम भी लखनऊ में शुरू होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल ने देश की सुरक्षा को मजबूत किया है और आतंकवादियों को करारा जवाब देने में अहम भूमिका निभाई है। यदि कोई दुश्मन दोबारा देश की ओर आंख उठाकर देखने की कोशिश करेगा तो उसे इसका गंभीर परिणाम भुगतना पड़ेगा।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि डिफेंस सेक्टर में हो रहे नए प्रोजेक्ट्स से स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि ब्रह्मोस से जुड़े कई इंजीनियर उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों से हैं, जिनमें AKTI, पॉलीटेक्निक और अन्य सरकारी कॉलेजों के छात्र भी शामिल हैं। इससे यह साबित होता है कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है और उन्हें अवसर मिलने पर वे देश की सुरक्षा और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार विकास और सुशासन को प्राथमिकता देते हुए लगातार नई परियोजनाओं पर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि जिस जमीन पर पहले अवैध कब्जा किया गया था, उसी जमीन से कब्जा हटाकर और उससे मिलने वाले संसाधनों से यह प्रोजेक्ट तैयार किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के लिए शासन को प्राधिकरण को अलग से कोई पैसा नहीं देना पड़ा।
सीएम योगी ने कहा कि सरकार राजधानी लखनऊ को आधुनिक तकनीक और नए उद्योगों का केंद्र बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने की योजना भी बनाई गई है और इसके लिए आवश्यक धन की व्यवस्था कर ली गई है। उनका कहना था कि आने वाले समय में लखनऊ इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
मुख्यमंत्री ने स्वच्छता के क्षेत्र में भी शहर की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले गोमती नदी में लोग कूड़ा फेंक देते थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है और शहर में घर-घर से कूड़ा उठाने की व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष स्वच्छता सर्वेक्षण में लखनऊ को तीसरी रैंक मिली थी, जो शहरवासियों और प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है।
कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर और लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाएं प्रदेश के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनसे न केवल यातायात व्यवस्था बेहतर होगी बल्कि आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्र में भी लखनऊ को नई पहचान मिलेगी। कुल मिलाकर यह परियोजना राजधानी के विकास की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
