नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अब भारतीय शेयर बाजार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। निवेशकों में बढ़ती चिंता और वैश्विक बाजारों में कमजोरी के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक करीब एक प्रतिशत तक लुढ़क गए। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और रुपये की कमजोरी ने भी बाजार के माहौल को और ज्यादा नकारात्मक बना दिया है।
शुक्रवार को बाजार खुलते ही निवेशकों में बेचैनी का माहौल देखने को मिला। कारोबार के शुरुआती दौर में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स करीब 708 अंकों की गिरावट के साथ 75 हजार 326 के स्तर पर पहुंच गया। इसी तरह 50 शेयरों वाला एनएसई निफ्टी भी 222 अंकों की गिरावट के साथ 23 हजार 417 के स्तर पर आ गया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ बाजार में गिरावट और भी तेज हो गई। दोपहर करीब 1 बजकर 6 मिनट तक सेंसेक्स में 1239 अंकों से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई और यह 74 हजार 794 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी 421 अंकों से ज्यादा गिरकर 23 हजार 217 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर बना दिया है। इसके कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है और वे जोखिम लेने से बच रहे हैं। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार पर दबाव बना रही है। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो आयात बिल बढ़ जाता है और इसका असर देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है।
अगर सेंसेक्स की कंपनियों की बात करें तो ज्यादातर कंपनियों के शेयर गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। लार्सन एंड टुब्रो, टाटा स्टील, इंटरग्लोब एविएशन, अल्ट्राटेक सीमेंट, एचडीएफसी बैंक और टेक महिंद्रा जैसे दिग्गज शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। इन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण बाजार पर दबाव और बढ़ गया। हालांकि कुछ कंपनियों के शेयरों में हल्की तेजी भी देखने को मिली। पावर ग्रिड, हिंदुस्तान यूनिलीवर, आईटीसी और बजाज फिनसर्व जैसी कंपनियां इस गिरावट के बीच भी लाभ में कारोबार करती दिखाई दीं। लेकिन इनकी बढ़त बाजार की कुल गिरावट को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं रही।
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी कमजोरी का रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक, जापान का निक्केई 225, चीन का शंघाई एसएसई कंपोजिट और हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक सभी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। वहीं अमेरिका के बाजारों में भी गुरुवार को भारी गिरावट दर्ज की गई थी। अमेरिकी शेयर बाजार में नैस्डैक कंपोजिट करीब 1.78 प्रतिशत, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.56 प्रतिशत और एसएंडपी 500 सूचकांक 1.52 प्रतिशत तक गिर गया था। इसका सीधा असर शुक्रवार को भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा हालात में वैश्विक अनिश्चितता निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार का कहना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी बाजारों में कमजोरी इस बात का संकेत देती है कि बाजार में स्थिरता लौटने में अभी कुछ समय लग सकता है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी बाजार की चिंता को बढ़ा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव बढ़कर करीब 100 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। तेल की कीमतों में तेजी का असर परिवहन, उत्पादन और अन्य उद्योगों की लागत पर पड़ता है, जिससे कंपनियों की कमाई प्रभावित हो सकती है।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक यानी एफआईआई लगातार भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। गुरुवार को एफआईआई ने करीब 7 हजार 49 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों यानी डीआईआई ने करीब 7 हजार 449 करोड़ रुपये के शेयर खरीदकर बाजार को कुछ हद तक सहारा देने की कोशिश की।
गौरतलब है कि गुरुवार को भी भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ था। सेंसेक्स करीब 829 अंकों की गिरावट के साथ 76 हजार 34 के स्तर पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी भी करीब 227 अंकों की गिरावट के साथ 23 हजार 639 के स्तर पर बंद हुआ था। कुल मिलाकर वैश्विक हालात, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी निवेशकों की बिकवाली फिलहाल बाजार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। निवेशक भी सावधानी बरतते हुए बाजार में निवेश कर रहे हैं और आने वाले दिनों में वैश्विक परिस्थितियों पर उनकी नजर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रह सकता है।
