बरेली : 6 साल पुराने हत्याकांड में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मन्नापुरम गोल्ड फाइनेंस कंपनी में ऑडिटर (लेखा परीक्षक) के पद पर तैनात मुनीषपाल की हत्या के मामले में बदायूं निवासी शंकरलाल उर्फ हरिशंकर को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके साथ ही 23 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। यह मामला प्रेम संबंध से जुड़ा था, जो खूनखराबे तक पहुंच गया। इस मामले में शासकीय अधिवक्ता फौजदारी (डीजीसी) रीतराम राजपूत ने पीड़ित की तरफ से मजबूत पैरवी की थी। इस मामले में 29 गवाह पेश किए गए थे।
परिवार की शिकायत
बरेली शहर के बिथरी चैनपुर थाना क्षेत्र के गांव निवासी परिजनों के अनुसार, मुनीषपाल का गांव के ही शंकरलाल की पत्नी से अवैध संबंध था। इसी कारण शंकरलाल पहले भी कई बार मुनीषपाल को जान से मारने की धमकी दे चुका था। घटना 5 फरवरी, 2020 की है। आरोप है कि शंकरलाल ने मुनीषपाल को दावत के बहाने घर से बुलाया और हत्या कर दी। उसके बाद शव को ग्राम कचौली के पास हाईवे किनारे फेंक दिया, ताकि मामला हादसा लगे।
कोर्ट में पेश हुए गवाह
थाना बिथरी चैनपुर में हत्या और सबूत मिटाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। अदालत में अभियोजन पक्ष ने कुल 13 गवाह पेश किए सभी गवाहों और सबूतों के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया। अदालत ने शंकरलाल को हत्या के मामले में आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माना, तथा सबूत छिपाने के आरोप में 4 साल की सजा और 3 हजार रुपये जुर्माना दिया। जुर्माना न देने पर अतिरिक्त जेल की सजा भी भुगतनी होगी। इस मामले में
