बरेली : शहर में गृहकर बकायेदारों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई उस वक्त विवादों में आ गई, जब भूड़ स्थित प्राचीन बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर के नाम पर लाखों रुपये के टैक्स बकाया का सार्वजनिक नोटिस जारी कर दिया गया। नोटिस में मंदिर के नाम 1,82,181.52 रुपये और 1,76,874.93 रुपये बकाया बताते हुए सीलिंग और कुर्की की चेतावनी दी गई, जिसे देखकर श्रद्धालुओं और मंदिर समिति से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया। हालांकि, नगर निगम का शहर भर में करीब 37 करोड़ टैक्स बकाया है।
सार्वजनिक नोटिस में मंदिर का नाम आते ही मचा बवाल
नगर निगम द्वारा अखबारों में जारी सार्वजनिक नोटिस में जब त्रिवटीनाथ मंदिर का नाम सामने आया तो यह खबर तेजी से फैल गई कि मंदिर पर टैक्स बकाया है और कुर्की की कार्रवाई हो सकती है। इस सूचना के बाद मंदिर समिति के सदस्यों और भक्तों ने इसे आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए कड़ा विरोध जताया और निगम प्रशासन से तत्काल जांच की मांग की।
नगर निगम की सफाई-मंदिर पर नहीं, दुकानों पर है बकाया
मामला तूल पकड़ता देख नगर निगम टैक्स विभाग ने स्थिति स्पष्ट की। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पी.के. द्विवेदी ने कहा कि “नगर निगम मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल से गृहकर नहीं वसूलता। त्रिवटीनाथ मंदिर परिसर के पास स्थित दो व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर टैक्स बकाया है। नोटिस उन्हीं दुकानों के संबंध में जारी किया गया है, मंदिर के नाम से जोड़कर गलत संदेश फैलाया जा रहा है।”उन्होंने बताया कि सार्वजनिक नोटिस में तकनीकी कारणों से मंदिर का नाम जुड़ गया, जिसे अब संशोधित किया जा रहा है।
मंदिर समिति ने बताया भ्रामक सूचना
बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर सेवा समिति के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने भी साफ कहा कि,“मंदिर समिति पर किसी भी तरह का कोई टैक्स बकाया नहीं है। मंदिर के बाहर बनी दुकानों की देनदारी को गलत तरीके से मंदिर से जोड़ा गया है। मंदिर समिति का इससे कोई लेना-देना नहीं है।” वहीं मंदिर समिति के सदस्य संजीव औतार ने बताया कि समिति को अभी तक कोई आधिकारिक नोटिस प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन अखबारों में प्रकाशित नोटिस में मंदिर का नाम आने से भ्रम फैला है। इसे दुरुस्त कराने के लिए नगर निगम अधिकारियों को पत्र लिखा जा रहा है।
आस्था से जुड़ा मामला, सतर्कता की जरूरत
इस पूरे प्रकरण के बाद सवाल उठ रहा है कि सार्वजनिक नोटिस जारी करते समय स्पष्टता क्यों नहीं बरती गई। धार्मिक स्थल का नाम टैक्स बकायेदार के रूप में सामने आना न सिर्फ भ्रम पैदा करता है, बल्कि लोगों की आस्था को भी ठेस पहुंचा सकता है। फिलहाल नगर निगम ने स्थिति स्पष्ट कर दी है और नोटिस में सुधार की बात कही है।
