दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन ने लोगों से ज़कात और सदक़ा जल्द से जल्द अदा करने को कहा, ताकि जरूरतमंद मुसलमान भी ईद मनाएं
शहर इमाम बोले-रमज़ान इंसान को सब्र, इबादत और जरूरतमंदों की मदद का देता है पैगाम
बरेली : रमज़ान के मुक़द्दस महीने के आख़िरी जुमे यानी जुमा-तुल-विदा के मौके पर बरेली शहर पूरी तरह इबादत और रूहानियत के माहौल में डूबा नजर आया। शहर की मस्जिदों, दरगाहों और खानकाहों में हजारों की तादाद में रोज़ेदारों ने नमाज़ अदा कर मुल्क में अमन-ओ-अमान, तरक्की और भाईचारे की दुआ मांगी। प्रशासन की ओर से भी इस अहम मौके को देखते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस प्रशासन के मुताबिक पूरे जिले में 1383 मस्जिदों को चिन्हित किया गया था। यहां अलविदा जुमे की नमाज़ अदा की गई। अलग-अलग मस्जिदों में नमाज़ का समय दोपहर 12:45 बजे से शाम 4 बजे तक रखा गया था, ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके।
जामा मस्जिद में उमड़ी नमाज़ियों की भीड़
दरगाह आला हजरत के मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि शहर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में अलविदा जुमे की मुख्य नमाज़ दोपहर 1:30 बजे अदा की गई। यहां शहर इमाम मुफ़्ती खुर्शीद आलम ने पहले ख़ुत्बा पढ़ा और इसके बाद नमाज़ अदा कराई। अपने खिताब में उन्होंने रमज़ान की फ़ज़ीलत, कुरआन की अजमत और ज़कात व सदक़ा-ए-फितर की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि रमज़ान इंसान को सब्र, इबादत और जरूरतमंदों की मदद करने का पैगाम देता है। नमाज़ के बाद देश में अमन-चैन और खुशहाली के लिए खास दुआ की गई।
दरगाह आला हज़रत में सबसे आखिर में अदा हुई नमाज़
दरगाह आला हजरत की रज़ा मस्जिद में अलविदा जुमे की नमाज़ शाम 3:30 बजे अदा की गई। नमाज़ की इमामत मुफ़्ती ज़ईम रज़ा ने कराई। इस मौके पर दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रज़ा खां (सुब्हानी मियां), सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा खां कादरी और आला हज़रत परिवार के अन्य लोग भी मौजूद रहे।
मुफ्ती अहसन मियां ने कहा कि रमज़ान के आख़िरी जुमे को जुमा-तुल-विदा कहा जाता है और इसमें कोई अलग नमाज़ नहीं होती, बल्कि आम जुमे की तरह दो रकात फ़र्ज़ अदा की जाती है। उन्होंने कहा कि सदक़ा-ए-फितर हर सक्षम व्यक्ति पर वाजिब है, चाहे उसने रोज़ा रखा हो या नहीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि ज़कात और सदक़ा जल्द से जल्द अदा करें, ताकि जरूरतमंद मुसलमान भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
दरगाहों और मस्जिदों में दिनभर चलता रहा नमाज़ का सिलसिला
शहर की कई प्रमुख दरगाहों और मस्जिदों जैसे दरगाह ताजुश्शरिया, दरगाह शाह शराफ़त अली मियां, दरगाह शाहदाना वली, दरगाह वली मियां, खानकाह-ए-नियाज़िया और मस्जिद नौमहला में भी तय समय पर नमाज़ अदा की गई। इसके अलावा मोती मस्जिद, नूरानी मस्जिद,सुनहरी मस्जिद, छः मीनारा मस्जिद, बीबी जी मस्जिद, हबीबिया मस्जिद और कचहरी वाली मस्जिद समेत शहर की सैकड़ों मस्जिदों में नमाज़ियों की भारी भीड़ देखने को मिली।
रोज़ेदारों ने नम आंखों से कहा-अलविदा माहे रमज़ान
अलविदा जुमे के मौके पर रोज़ेदारों के दिलों में रमज़ान की रुखसती का गम भी साफ दिखाई दिया। मस्जिदों में नमाज़ के दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं और उन्होंने अल्लाह से दुआ की कि अगले साल भी रमज़ान की बरकतें नसीब हों। मोती मस्जिद के हाफिज़ चांद खान ने कहा कि रमज़ान का महीना हमें रोज़ा, नमाज़, तरावीह और नेकियों की राह दिखाता है। वहीं सिविल लाइंस स्थित नोमहला मस्जिद के इमाम मुफ़्ती अब्दुल बाकी ने कहा कि यह महीना रहमत, मग़फिरत और नजात का महीना है और मुसलमानों को सालभर इबादत जारी रखनी चाहिए। इस मौके पर पम्मी ख़ाँ वारसी ने नमाज़ियों का इत्र लगाकर स्वागत किया और लोगों से जरूरतमंदों की मदद करने तथा समाज में भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
दुआओं के साथ रमज़ान की विदाई
अलविदा जुमे की नमाज़ के साथ ही रमज़ान के आखिरी दिनों की शुरुआत हो गई है। मस्जिदों में रोज़ेदारों ने अल्लाह की बारगाह में अपने गुनाहों की माफी, मुल्क में अमन-चैन और तरक्की की दुआ की। अब सभी की निगाहें ईद-उल-फितर के चांद पर टिकी हैं, जो रमज़ान के मुकम्मल होने और खुशियों के त्योहार की आमद का पैगाम लेकर आएगा।
सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, ड्रोन से निगरानी
जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनुराग आर्य ने मीडिया को बताया कि त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पहले ही पीस कमेटी की बैठकें आयोजित कर ली गई थीं, जिनमें सभी धर्मों के जिम्मेदार लोगों से संवाद किया गया।सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए जिले में 152 क्लस्टर मोबाइल टीमें बनाई गईं और कई संवेदनशील इलाकों में ड्रोन से निगरानी की गई। इसके अलावा दो कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरआरएफ भी तैनात की गई। इसी कड़ी में एसपी सिटी मानुष पारीक, सीओ आशुतोष शिवम ने भारी पुलिस बल के साथ शहर में फ्लैग मार्च निकाला और आम जनता को सुरक्षा का भरोसा दिलाया। देहात इलाकों की मस्जिदों में भी शांति से नमाज अदा की गई।
