नई दिल्ली : भारत में एक बार फिर चुनावी माहौल बनने जा रहा है। चुनाव आयोग ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। जिन राज्यों में चुनाव होने हैं उनमें असम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में भी विधानसभा के लिए मतदान कराया जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी राज्यों में मतदान की तारीखें, नामांकन प्रक्रिया और मतगणना की तारीखों की पूरी जानकारी जारी कर दी है।
चुनाव आयोग के मुताबिक असम, केरल और पुडुचेरी में एक ही चरण में मतदान कराया जाएगा। इन तीनों जगहों पर चुनाव की अधिसूचना 16 मार्च को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 23 मार्च तय की गई है, जबकि 24 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी। इसके बाद उम्मीदवार 26 मार्च तक अपना नाम वापस ले सकेंगे। इन राज्यों में मतदान 9 अप्रैल को कराया जाएगा और मतगणना 4 मई को होगी।
असम विधानसभा में कुल 126 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को 64 सीटों का बहुमत चाहिए। वहीं केरल विधानसभा में 140 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 71 है। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की विधानसभा में 30 सीटें हैं, जहां बहुमत के लिए 16 सीटों की जरूरत होगी।
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम थोड़ा अलग है। यहां चुनाव की अधिसूचना 30 मार्च को जारी होगी। उम्मीदवार 6 अप्रैल तक नामांकन दाखिल कर सकेंगे। 7 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी और 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान होगा और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। तमिलनाडु विधानसभा में कुल 234 सीटें हैं और बहुमत का आंकड़ा 118 है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में कराया जाएगा। पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान होगा। इसके लिए अधिसूचना 30 मार्च को जारी होगी, नामांकन की अंतिम तारीख 6 अप्रैल होगी, 7 अप्रैल को जांच होगी और 9 अप्रैल तक नाम वापस लिए जा सकेंगे। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होगा।
दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल की 142 सीटों पर चुनाव कराया जाएगा। इसके लिए अधिसूचना 2 अप्रैल को जारी होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 9 अप्रैल होगी और 10 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवार 13 अप्रैल तक नाम वापस ले सकेंगे। दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। पश्चिम बंगाल में कुल 294 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 148 सीटों की जरूरत होगी।
इन चुनावों में मतदाताओं की संख्या भी काफी बड़ी है। पश्चिम बंगाल में करीब 6.44 करोड़ मतदाता हैं, जबकि केरल में लगभग 2.70 करोड़ मतदाता मतदान करेंगे। केरल में करीब 1.31 करोड़ पुरुष मतदाता हैं। असम में करीब 2.5 करोड़ मतदाता हैं और यहां करीब 31 हजार मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
चुनाव आयोग के अनुसार पांचों राज्यों में कुल मिलाकर करीब 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से कराने के लिए करीब 2 लाख 18 हजार 870 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लगभग 8.5 लाख सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। मतगणना के दौरान करीब 40 हजार कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन चुनावों के लिए करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी तैनात किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में करीब 2.19 लाख मतदान केंद्रों पर मतदान कराया जाएगा। प्रत्येक मतदान केंद्र पर औसतन 750 से 900 मतदाता होंगे, ताकि मतदान प्रक्रिया सुचारू और व्यवस्थित तरीके से पूरी हो सके।
चुनाव आयोग ने इस बार चुनाव प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं भी की हैं। मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के मोबाइल जमा करने की सुविधा उपलब्ध होगी। ईवीएम पर उम्मीदवारों की रंगीन फोटो और बड़े अक्षरों में नाम प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे मतदाताओं को पहचान में आसानी होगी। प्रत्येक मतदान केंद्र पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जाएंगे ताकि भीड़ कम हो और मतदान प्रक्रिया सुगम हो सके।
इसके अलावा मतदान केंद्र से 100 मीटर की दूरी पर उम्मीदवारों के सहायता बूथ लगाने की अनुमति दी जाएगी। मतदाताओं को दी जाने वाली सूचना पर्ची को पहले से अधिक स्पष्ट और बेहतर बनाया गया है। चुनाव आयोग ने सभी प्रमुख मतदाता सेवाओं और चुनाव से जुड़े हितधारकों के लिए एक वन-स्टॉप डिजिटल प्लेटफॉर्म भी तैयार किया है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी मतदान केंद्रों पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई है। साथ ही हर दो घंटे में मतदान प्रतिशत का डेटा ECINET पोर्टल पर सीधे अपलोड किया जाएगा।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि किसी भी लोकतंत्र की नींव एक शुद्ध और सटीक मतदाता सूची होती है। इसी उद्देश्य से विशेष मतदाता सूची संशोधन किया जा रहा है ताकि कोई भी पात्र मतदाता मतदान से वंचित न रहे और कोई भी अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो। उन्होंने इस कार्य में लगे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इसके सफल संचालन के लिए बधाई भी दी। अब चुनावी तारीखों के ऐलान के साथ ही इन राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो जाएंगी और सभी दल जनता को अपने पक्ष में करने के लिए चुनावी मैदान में उतरेंगे। 4 मई को मतगणना के साथ ही यह तय हो जाएगा कि इन राज्यों में अगली सरकार किसकी बनेगी।
