अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर रिपब्लिकन पार्टी से संसद का नियंत्रण छीन लिया। मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद ने जीत का दावा किया है, जबकि विस्कॉन्सिन में डेविड क्राउली ने गवर्नर पद का चुनाव जीतकर इतिहास रच दिया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए 2026 के मध्यावधि चुनाव बड़ा राजनीतिक झटका लेकर आए हैं। चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण खत्म हो गया है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, डेमोक्रेट्स ने कई ऐसे राज्यों में भी जीत दर्ज की है, जिन्हें पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। इन नतीजों से ट्रंप के कार्यकाल के अगले दो वर्षों में उनकी नीतियों और विधायी एजेंडे के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
सीनेट और प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स का बहुमत
इस बार प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 35 सीटों पर चुनाव हुआ। इसके अलावा 36 राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी मतदान कराया गया। चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों में नियंत्रण था, लेकिन नतीजों ने सत्ता का संतुलन बदल दिया। डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में बहुमत हासिल करने के साथ प्रतिनिधि सभा पर भी कब्जा कर लिया है। कंसास, आयोवा, टेक्सस, ओहायो, मेन, नॉर्थ कैरोलिना और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेट्स की जीत को इस चुनाव की बड़ी उपलब्धियों में गिना जा रहा है।
मिशिगन में अब्दुल एल-सैयद ने जीत का दावा किया
मिशिगन की सीनेट सीट पर डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल एल-सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स को हराने का दावा किया है। उनकी जीत की खबर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह अमेरिकी सीनेट पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सांसद बन सकते हैं। हालांकि, एसोसिएटेड प्रेस ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि उसने उस समय तक इस मुकाबले को आधिकारिक तौर पर विजेता घोषित नहीं किया था। ऐसे में अंतिम नतीजे की पुष्टि के लिए आधिकारिक चुनावी घोषणा का इंतजार जरूरी है।
डेविड क्राउली बने विस्कॉन्सिन के पहले अश्वेत गवर्नर
विस्कॉन्सिन के गवर्नर चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार डेविड क्राउली ने रिपब्लिकन उम्मीदवार टॉम टिफनी को हरा दिया है। इस जीत के साथ क्राउली राज्य के पहले अश्वेत गवर्नर बन गए हैं। सीबीएस न्यूज के मुताबिक, क्राउली ने चुनाव प्रचार के दौरान टिफनी के राष्ट्रपति ट्रंप के साथ राजनीतिक संबंधों को भी मुद्दा बनाया था। इस नतीजे को भी डेमोक्रेटिक पार्टी की चुनावी सफलता के अहम हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
ट्रंप के सामने अब वीटो शक्ति का इस्तेमाल करने की चुनौती
संसद के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक पार्टी का बहुमत होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाना आसान नहीं होगा। संसद में डेमोक्रेट्स के समर्थन से पारित होने वाले विधेयकों को राष्ट्रपति वीटो कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी संविधान के तहत यदि दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत से किसी विधेयक को दोबारा पारित कर दिया जाए, तो राष्ट्रपति का वीटो निष्प्रभावी हो सकता है। चुनावी नतीजों के बाद ट्रंप ने डेमोक्रेट्स को जीत की बधाई दी और कहा कि उनकी पार्टी ने अच्छा चुनाव प्रचार किया। उन्होंने हालांकि इन नतीजों को अपने खिलाफ व्यक्तिगत फैसला मानने से इनकार किया।
