भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण पर कथित विवादित टिप्पणियों को लेकर सपा अध्यक्ष ने जताई नाराजगी, बोले- यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाएं हुईं आहत, 17 नवंबर से प्रतापगढ़ में होनी है धीरेंद्र शास्त्री की कथा
लखनऊ: भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण को लेकर कथित विवादित टिप्पणियों के मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री पर तीखा हमला बोला है। अखिलेश यादव ने नाराजगी जताते हुए कहा कि धीरेंद्र शास्त्री ने यदुवंशियों और रघुवंशियों दोनों की भावनाओं को आहत किया है। उन्होंने कहा कि अब उन्हें न ब्रज में प्रवेश मिलेगा और न अवध में। अखिलेश ने यह भी कहा कि कोई सच्चा रघुवंशी उनका स्वागत नहीं करेगा और न ही कोई सच्चा यदुवंशी उनका स्वागत करेगा।
ब्रज और अवध में प्रवेश को लेकर अखिलेश का तीखा बयान
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमा पर नाकाबंदी का बोर्ड लगा देना चाहिए, जिस पर लिखा हो कि ईशनिंदा करने वालों का उत्तर प्रदेश की धर्मभूमि पर प्रवेश वर्जित है। उन्होंने आगे कहा कि जिसने धर्म-मजहब नहीं छोड़ा, वह अगली बार समुदायों पर छींटाकशी करने से बाज नहीं आएगा। अखिलेश ने अपने बयान में नेपाल सीमा का भी जिक्र किया और कहा कि उसे भी बंद करना पड़ सकता है, ताकि कोई वहां से दूसरे रास्ते प्रदेश में प्रवेश न कर सके।
धार्मिक और राजनीतिक टकराव में भगवान को लाने पर उठाए सवाल
सपा अध्यक्ष ने अपने बयान में राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसी बाहरी के इशारे पर किसी की राजनीतिक और धार्मिक सत्ता को चुनौती देने का काम होता दिखाई दे रहा है। अखिलेश यादव ने सवाल किया कि आपसी टकराहट में सियासी लोग भगवान को क्यों ला रहे हैं। उनका यह बयान धीरेंद्र शास्त्री की कथित टिप्पणियों को लेकर चल रहे विवाद के बीच सामने आया है।
17 नवंबर से प्रतापगढ़ में होनी है धीरेंद्र शास्त्री की कथा
अखिलेश यादव का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पंडित धीरेंद्र शास्त्री 17 नवंबर से प्रतापगढ़ में आयोजित होने वाली कथा में शामिल होने वाले हैं। इस कथा का आयोजन जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष और कुंडा विधायक राजा भैया की ओर से कराया जा रहा है। इससे पहले भी अखिलेश यादव इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। अब उनके ताजा बयान के बाद धीरेंद्र शास्त्री की प्रस्तावित कथा और इस पूरे विवाद को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
