बहराइच के चौधरी गांव में प्रेमी से शादी की मांग को लेकर टावर पर चढ़ी युवती; मुंबई में मौजूद नूरुद्दीन से वीडियो कॉल पर निकाह की रस्म पूरी कराने के बाद सुरक्षित नीचे उतारा गया
बहराइच: उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के चौधरी गांव में शादी की मांग को लेकर एक युवती के मोबाइल टावर पर चढ़ने का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि युवती नूरुद्दीन नाम के युवक से शादी करना चाहती थी, लेकिन दोनों परिवार इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। इससे नाराज होकर युवती गांव में लगे बीएसएनएल के करीब 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़ गई और शादी होने तक नीचे उतरने से इनकार कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को सुरक्षित नीचे उतारने के प्रयास शुरू किए।
शादी की मांग को लेकर टावर पर चढ़ी युवती
जानकारी के मुताबिक, नूरुद्दीन काम के सिलसिले में मुंबई में रहता है, जबकि युवती बहराइच के चौधरी गांव में रहती है। बताया जा रहा है कि दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवारों की असहमति के कारण उनका विवाह नहीं हो पा रहा था। इसी बात से परेशान होकर युवती मोबाइल टावर पर चढ़ गई। उसे इतनी ऊंचाई पर देखकर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। युवती ने शर्त रखी कि जब तक उसकी शादी नूरुद्दीन से नहीं कराई जाएगी, वह टावर से नीचे नहीं उतरेगी। मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे समझाने का प्रयास किया, ताकि किसी तरह की अनहोनी से बचा जा सके।
मुंबई में मौजूद प्रेमी से वीडियो कॉल पर संपर्क
काफी देर तक समझाने-बुझाने के बाद पुलिस और गांव के बुजुर्गों ने मामले को सुलझाने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि मुंबई में मौजूद नूरुद्दीन से वीडियो कॉल के जरिए संपर्क किया गया। इसके बाद मौके पर काजी को बुलाया गया और टावर के नीचे से ही निकाह की रस्म पूरी कराई गई। मिली जानकारी के अनुसार, वीडियो कॉल के माध्यम से निकाह की प्रक्रिया पूरी हुई। हालांकि, निकाह की कानूनी और धार्मिक औपचारिकताओं की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
निकाह के बाद युवती को सुरक्षित नीचे उतारा
निकाह की रस्म पूरी होने के बाद पुलिस और परिजनों ने युवती को समझाया और सुरक्षित नीचे उतार लिया। युवती के नीचे आने के बाद पुलिस और ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। इस घटना की चर्चा क्षेत्र में हो रही है। फिलहाल, इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने आने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पारिवारिक असहमति के बीच विवाह जैसे संवेदनशील मामलों को बातचीत और समझदारी से सुलझाना कितना जरूरी है।
