किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान, डॉ. सुनीलम बोले- लोकतंत्र की बहाली और जवाबदेही के लिए एकजुट हों संगठन
नई दिल्ली/मध्य प्रदेश: किसान संघर्ष समिति की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुनीलम की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में छह राज्यों के पदाधिकारियों, प्रदेश कार्यकारिणी के सदस्यों और 25 जिलों के जिला अध्यक्षों ने भाग लिया। बैठक में 23 अक्टूबर को देशभर में प्रस्तावित आंदोलन की तैयारियों पर चर्चा की गई। समिति ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) रद्द करने और जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के अधिकार की बहाली की मांग उठाई।
पुलिस कार्रवाई के विरोध में 23 अक्टूबर को प्रदर्शन का आह्वान
बैठक को संबोधित करते हुए डॉ. सुनीलम ने आरोप लगाया कि दिल्ली में युवा आंदोलनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से विभिन्न संगठनों में आक्रोश है। उन्होंने कहा कि युवाओं ने वर्ष 1974 के छात्र आंदोलन की तरह लोकतंत्र की बहाली और व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के लिए संघर्ष शुरू किया है। डॉ. सुनीलम ने दावा किया कि युवा संगठनों, नागरिक संगठनों, किसान संगठनों और विपक्षी दलों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से 23 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को सफल बनाने के लिए जुटने की अपील की। उन्होंने तिरंगा लेकर विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि आंदोलनकारी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का अधिकार बहाल कराने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। समिति ने इस दिन को ‘लोकतंत्र बहाली दिवस’ के रूप में मनाने का आह्वान किया है।
किसान और नागरिक संगठनों से एकजुट होने की अपील
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रोफेसर सुशीला ताई मोराळे ने कहा कि किसानों में युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई को लेकर नाराजगी है और 23 अक्टूबर को यह विरोध देशभर में दिखाई देगा। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के सभी जिलों में कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। राष्ट्रीय महासचिव एडवोकेट शिव सिंह और राष्ट्रीय प्रवक्ता चरण सिंह ने किसान नेताओं तथा नागरिक संगठनों से अपने झंडे और बैनर से ऊपर उठकर आंदोलन में भाग लेने की अपील की। उन्होंने संगठनों के प्रतिनिधियों से फेसबुक लाइव करने और छोटे वीडियो बनाकर यूट्यूब पर साझा करने का भी अनुरोध किया, ताकि आंदोलन का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके। शिव सिंह के मुताबिक, विंध्य क्षेत्र के जिलों में भी कार्यक्रम की तैयारी चल रही है। कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह शंकु ने कहा कि 23 अक्टूबर और 26 नवंबर के कार्यक्रमों की तैयारियां की जा रही हैं। उन्होंने पिछले किसान आंदोलन के समर्थन में रीवा में 380 दिनों तक चले धरने का भी उल्लेख किया।
खाद संकट, परमाणु परियोजनाओं और जमीन के मुद्दे भी उठे
बैठक में मध्य प्रदेश से जुड़े किसान और पर्यावरण के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट आराधना भार्गव ने कहा कि किसान संघर्ष समिति छिंदवाड़ा को केंद्र बनाकर प्रस्तावित छह परमाणु बिजली परियोजनाओं के खिलाफ काम कर रही है। उन्होंने पेंच व्यपवर्तन परियोजना से प्रभावित किसानों को न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में चल रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। संदीप ठाकुर ने खाद की उपलब्धता को लेकर किसानों की परेशानियां उठाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि किसान खाद लेने के लिए 50 से 100 किलोमीटर तक भटक रहे हैं और ई-टोकन व्यवस्था के कारण उन्हें लंबी कतारों का सामना करना पड़ रहा है। सिंगरौली के जिला अध्यक्ष अशोक सिंह पैगाम और अखिलेश शाह ने कोयला खदानों तथा प्रस्तावित खनन गतिविधियों को लेकर आदिवासियों और किसानों की जमीन पर पड़ने वाले असर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि जमीन और जंगल से जुड़े अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।बैठक में बिहार, उत्तराखंड, ओडिशा और हिमाचल प्रदेश के पदाधिकारियों ने भी अपने विचार रखे। किसान संघर्ष समिति ने 23 अक्टूबर के आंदोलन को सफल बनाने के लिए विभिन्न संगठनों से सहयोग की अपील की है। बैठक में व्यक्त आरोप और मांगें समिति की ओर से जारी प्रेस नोट पर आधारित हैं।
