युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ बातचीत में राहुल गांधी ने पार्टी छोड़ने वाले नेताओं पर की टिप्पणी, इंदिरा गांधी से जुड़ा किस्सा सुनाकर समझाया राजनीति में दोस्ती का मतलब
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अनौपचारिक बातचीत के दौरान पार्टी छोड़कर गए नेताओं का जिक्र किया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने ज्योतिरादित्य सिंधिया और गुलाम नबी आजाद जैसे नेताओं का उदाहरण देते हुए कहा कि कायरों और लालचियों के चले जाने के बाद कांग्रेस में अब केवल शेर बचे हैं। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी की कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेता राहुल गांधी के दोस्त थे।
‘राहुल गांधी के दोस्त ही कांग्रेस छोड़कर गए’
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान खरगे ने राहुल गांधी से मजाकिया अंदाज में कहा कि पार्टी छोड़कर जाने वाले नेता उनके दोस्त थे। इस पर राहुल गांधी ने जवाब दिया कि उनकी बहन प्रियंका गांधी भी वहीं बैठी हैं और उन्हें पता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया उनके दोस्त नहीं थे। रिपोर्ट के अनुसार, राहुल गांधी ने कहा कि कुछ नेता सुविधाओं और सुरक्षा की चाह में पार्टी छोड़कर गए, जबकि कुछ ने प्रवर्तन निदेशालय और केंद्रीय जांच ब्यूरो जैसी एजेंसियों के डर से ऐसा किया। ये टिप्पणियां राहुल गांधी की ओर से पार्टी छोड़ने वाले नेताओं के बारे में व्यक्त किया गया नजरिया हैं।
इंदिरा गांधी से जुड़ा किस्सा सुनाया
राजनीतिक रिश्तों पर अपनी बात समझाने के लिए राहुल गांधी ने अपनी दादी और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार उन्होंने इंदिरा गांधी से पूछा था कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त कौन है। राहुल गांधी के मुताबिक, इंदिरा गांधी ने जवाब दिया कि उनकी कोई सबसे अच्छी दोस्त नहीं है। जब राहुल ने एक ऐसी महिला का नाम लिया जो अक्सर उनके घर आती थी, तो इंदिरा गांधी ने कहा कि संभव है वह महिला उन्हें अपनी सबसे अच्छी दोस्त मानती हो, लेकिन जरूरी नहीं कि वह भी उसे अपनी सबसे अच्छी दोस्त मानती हों।
‘जो दोस्त दिखता है, जरूरी नहीं कि असल में दोस्त हो’
राहुल गांधी ने इस किस्से के जरिए राजनीति में रिश्तों को लेकर अपना नजरिया रखा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति का दोस्त दिखाई देना इस बात की गारंटी नहीं है कि वह वास्तव में दोस्त ही हो। इसी तरह, जो व्यक्ति दुश्मन लगता है, जरूरी नहीं कि वह सच में दुश्मन हो। उन्होंने खरगे से कहा कि किसी राजनीतिक व्यक्ति के वास्तविक मित्रों की पहचान करना आसान नहीं होता। इस टिप्पणी के जरिए राहुल गांधी ने राजनीति में व्यक्तिगत संबंधों और सार्वजनिक व्यवहार के बीच अंतर की बात कही।
ज्योतिरादित्य सिंधिया और गुलाम नबी आजाद का जिक्र
राहुल गांधी की टिप्पणी में ज्योतिरादित्य सिंधिया और गुलाम नबी आजाद जैसे पूर्व कांग्रेस नेताओं का संदर्भ भी आया। सिंधिया ने 2020 में कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था। इसके बाद वह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री बने। गुलाम नबी आजाद ने भी 2022 में कांग्रेस से अलग होकर अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई थी। दोनों नेताओं के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, संगठन और राजनीतिक रणनीति को लेकर बहस होती रही है।
राहुल गांधी ने खरगे के उदाहरण से कार्यकर्ताओं को समझाया
बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने मल्लिकार्जुन खरगे का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें दो बार मुख्यमंत्री बनने का अवसर नहीं मिला, लेकिन उन्होंने अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया। राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं के सामने खरगे के राजनीतिक सफर का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र की मोदी सरकार के पास केवल आठ से दस महीने बचे हैं। यह राहुल गांधी का राजनीतिक आकलन था, न कि सरकार के कार्यकाल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा।
करीब 60 युवा कार्यकर्ताओं से की बातचीत
रिपोर्ट के मुताबिक, राहुल गांधी ने युवा कांग्रेस, भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन और सेवा दल के लगभग 60 कार्यकर्ताओं को पार्टी मुख्यालय में चाय पर बुलाया था। बातचीत के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को अपने काम में सक्रिय रहने और राजनीतिक संघर्ष जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया। राहुल गांधी ने विरोध-प्रदर्शन और संघर्ष को राजनीतिक प्रशिक्षण का अहम हिस्सा बताया। बैठक में पार्टी छोड़कर गए नेताओं, राजनीतिक रिश्तों और संगठन में काम करने के अनुभवों पर चर्चा हुई।
