वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से अदालत में पेश हुए दोनों दोषी, मुस्कान ने बच्चियों का ख्याल रखने की लगाई गुहार; 22 गवाहों के बयान और 126 सुनवाइयों के बाद आया फैसला
मेरठ: देशभर में सुर्खियों में रहे मेरठ के चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में जिला अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाई है। दोनों को 30 सितंबर 2026 को हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। बुधवार, 14 अक्टूबर को अदालत ने सजा का ऐलान किया। इस मामले में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष के 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेश हुए दोनों दोषी
बुधवार सुबह अदालत की कार्यवाही के दौरान मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को जिला जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। सजा सुनाने से पहले अदालत ने दोनों का पक्ष सुना। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस दौरान मुस्कान भावुक हो गई और उसने अपनी बच्चियों का ख्याल रखने की गुहार लगाई, जबकि साहिल की ओर से कोई खास प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और परिस्थितियों का हवाला देते हुए दोनों के लिए कठोरतम सजा की मांग की थी। अदालत ने दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ राजपूत की हत्या
यह मामला 3 मार्च 2025 की रात का है। सौरभ राजपूत मर्चेंट नेवी में काम कर चुके थे। वर्ष 2016 में उनकी शादी मुस्कान रस्तोगी से हुई थी। बाद में मुस्कान के साहिल शुक्ला के साथ प्रेम संबंध होने की बात सामने आई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की साजिश रची थी। आरोप था कि सौरभ को नशीला पदार्थ देकर बेहोश किया गया और फिर उनकी हत्या कर दी गई। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए उसके टुकड़े किए गए।
शव के टुकड़े कर नीले ड्रम में छिपाया
हत्या के बाद सौरभ के शव के टुकड़े कर उन्हें मेरठ के ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित मकान में रखे प्लास्टिक के नीले ड्रम में छिपा दिया गया था। आरोपियों ने शव को छिपाने के लिए ड्रम में सीमेंट और रेत का घोल भरकर उसे बंद कर दिया था। पुलिस जांच के दौरान इस वारदात का खुलासा हुआ। शव को छिपाने के तरीके और मामले की भयावह परिस्थितियों ने इसे देशभर में चर्चित बना दिया। पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया, जिसमें फॉरेंसिक साक्ष्य, कॉल डिटेल और गवाहों के बयान सहित विभिन्न साक्ष्य शामिल थे।
अभियोजन ने जघन्य अपराध बताते हुए मांगी थी फांसी
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों को साबित करने के लिए गवाहों और जांच से जुटाए गए साक्ष्यों पर भरोसा किया। अभियोजन ने अपराध की गंभीरता का हवाला देते हुए इसे दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में मानने और दोनों दोषियों को मृत्युदंड देने की मांग की थी। 30 सितंबर को दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत ने सजा सुनाने के लिए 14 अक्टूबर की तारीख तय की थी। निर्धारित तारीख पर अदालत ने दोनों को मौत की सजा सुनाई।
फैसले के बाद आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?
अदालत के फैसले के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। भारत में सत्र अदालत की ओर से सुनाई गई मृत्युदंड की सजा को लागू किए जाने से पहले उच्च न्यायालय की पुष्टि आवश्यक होती है। दोषियों को कानून के तहत अपील करने का अधिकार भी है। इसलिए अदालत की ओर से मौत की सजा सुनाए जाने और सजा पर अंतिम कानूनी मुहर लगने के बीच आगे की न्यायिक प्रक्रिया पूरी होना जरूरी है। मेरठ के इस चर्चित हत्याकांड में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी कार्यवाही पर नजर रहेगी।
