करीब 50 साल पुरानी इमारत के ढहने से मचा हड़कंप, रातभर चला राहत और बचाव अभियान; मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की बात कही
नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में बहुमंजिला इमारत ढहने से अब तक छह लोगों की मौत हो गई है, जबकि 11 लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है। हादसे के बाद राहत और बचाव अभियान सोमवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार सुबह एक बार फिर घटनास्थल का दौरा कर राहत एवं बचाव कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने बताया कि इमारत के मालिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि जांच में लापरवाही या चूक के लिए जो भी अधिकारी या अन्य लोग जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
50 साल पुरानी इमारत, तहखाने में पानी भरने से कमजोर हुए खंभे
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि हादसे का शिकार हुई इमारत करीब 50 साल पुरानी थी। उनके अनुसार, इमारत के तहखाने में पानी भरने से उसके खंभे कमजोर हो गए थे, जिसके कारण पूरी इमारत ढह गई। सत्य निकेतन में दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर के पास स्थित यह करीब पांच मंजिला इमारत लड़कों के पीजी आवास के रूप में इस्तेमाल हो रही थी। हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम भी चल रहा था। मुख्यमंत्री ने बताया कि हादसे के ठीक पीछे बनी इमारत को भी पूरी तरह खाली करा लिया गया है। एहतियात के तौर पर उसे भी गिराया जाएगा, ताकि किसी अन्य हादसे की आशंका न रहे।
मलबे से 11 लोग निकाले गए, छह की मौत
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अनुसार, हादसे में घायल 11 लोगों को जय प्रकाश नारायण आघात केंद्र लाया गया। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, पांच लोगों को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। वहीं गंभीर रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। इसके बाद हादसे में मृतकों की संख्या छह हो गई। अस्पताल में तीन घायलों का उपचार जारी है। इनमें से एक घायल के एक अंग की शल्य चिकित्सा की गई है। वहीं मामूली रूप से घायल एक अन्य व्यक्ति को निगरानी के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
रातभर चला राहत और बचाव अभियान
इमारत ढहने के बाद दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण समेत कई एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुट गईं। दक्षिण-पश्चिम जिले के पुलिस उपायुक्त अमित गोयल के अनुसार, रात के दौरान मलबे से एक और व्यक्ति को बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इसके बाद मृतकों की संख्या छह पहुंच गई। पुलिस के मुताबिक, घटना से कथित तौर पर जुड़े लोगों की तलाश जारी है। इमारत के मालिक और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। साथ ही घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
असुरक्षित पीजी में छात्रों को नहीं रहने देंगे: मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार छात्रों को असुरक्षित पीजी आवास में रहने की अनुमति नहीं देगी। हादसे के बाद इलाके से निकाले गए छात्रों के रहने की व्यवस्था कर दी गई है।उन्होंने कहा कि सरकार प्रभावित छात्रों की जरूरतों और सुरक्षा का पूरा ध्यान रख रही है। छात्रों के माता-पिता से भी सीधे संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें स्थिति की जानकारी मिलती रहे।मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि दिल्लीवासियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। लापरवाही के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
पीजी, नर्सिंग होम और स्कूलों के संरचनात्मक निरीक्षण की तैयारी
मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली सरकार नगर निगम के साथ मिलकर ऐसी नीति तैयार कर रही है, जिसके तहत सार्वजनिक गतिविधियों वाले पीजी आवास, नर्सिंग होम और स्कूलों का समय-समय पर संरचनात्मक निरीक्षण कराया जा सके। उन्होंने कहा कि जिन इमारतों को संरचनात्मक रूप से सुरक्षित प्रमाणित नहीं किया जाएगा, वहां किसी भी तरह की सार्वजनिक गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी।
आर्यभट्ट कॉलेज बंद, प्रभावित छात्रों के लिए बनाया गया अस्थायी आश्रय
सत्य निकेतन हादसे के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय के दक्षिणी परिसर स्थित आर्यभट्ट कॉलेज को सोमवार को बंद रखा गया। कॉलेज के गेट पर लगाए गए नोटिस में बताया गया कि हादसे के कारण सोमवार को पढ़ाई बंद रहेगी। कॉलेज को प्रभावित छात्रों के लिए अस्थायी आश्रय स्थल भी बनाया गया है। इस मुश्किल समय में छात्रों की सहायता और सहयोग के लिए शिक्षक तथा गैर-शिक्षण कर्मचारी उपलब्ध रहेंगे।
पुरानी इमारतों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
सत्य निकेतन जैसे घनी आबादी वाले इलाके में पीजी आवास के तौर पर इस्तेमाल हो रही करीब 50 साल पुरानी बहुमंजिला इमारत के ढहने से भवन सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हादसे के बाद सरकार ने जहां जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का संकेत दिया है, वहीं सार्वजनिक गतिविधियों वाली इमारतों के नियमित संरचनात्मक निरीक्षण की नीति बनाने की बात कही है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन की जांच जारी है। इसके साथ ही राहत एवं बचाव अभियान पर भी लगातार नजर रखी जा रही है।
