लाभार्थियों को मंच पर लाने की व्यवस्था स्पष्ट न होने से बिगड़ा माहौल, अधिकारियों पर नाराज हुए मुख्यमंत्री; बाद में पूरी हुई चेक वितरण प्रक्रिया
चित्रकूट: मंदाकिनी नदी की बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को राहत सामग्री वितरित की और पीड़ितों से उनकी समस्याएं जानीं। इसी दौरान बाढ़ पीड़ितों को चेक दिए जाने के कार्यक्रम में मंच पर अचानक अव्यवस्था की स्थिति बन गई। लाभार्थियों को मंच पर किस ओर से लाया जाना है, इसकी जानकारी कर्मचारियों को स्पष्ट नहीं थी। इससे कुछ देर के लिए मंच पर अफरातफरी का माहौल बन गया।
चेक वितरण के दौरान मंच पर मची अफरातफरी
कार्यक्रम में पांच बाढ़ पीड़ितों को चेक दिए जाने थे। लाभार्थियों को मंच पर लाने की व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के बीच समन्वय नजर नहीं आया। इसी दौरान मंच पर अव्यवस्था बढ़ गई।मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कार्यक्रम के प्रबंधन और लाभार्थियों को मंच तक पहुंचाने की प्रक्रिया को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा।
प्रभारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने संभाली स्थिति
मंच पर माहौल बिगड़ता देख प्रभारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को बीच में आना पड़ा। उन्होंने इशारे से स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। इसके बाद अधिकारियों ने बाढ़ पीड़ितों को मंच के किनारे से लाकर चेक दिलाए। व्यवस्था सामान्य होने के बाद चेक वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई और कार्यक्रम आगे बढ़ा।
बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री
करीब दो महीने पहले आठ जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चित्रकूट को 951 करोड़ रुपये की 124 विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी। उस समय कार्यक्रम का केंद्र सड़क, बिजली और अन्य विकास योजनाएं थीं। रविवार को तस्वीर अलग थी। मंदाकिनी की बाढ़ में घर-गृहस्थी गंवा चुके परिवारों के बीच मुख्यमंत्री पहुंचे। उन्होंने प्रभावित लोगों को राहत सामग्री बांटी और उनकी समस्याएं जानीं।
पीड़ित परिवारों से हालचाल लेते नजर आए मुख्यमंत्री
रामायण प्रेक्षागृह में राहत किट वितरण के दौरान मुख्यमंत्री बाढ़ पीड़ित परिवारों से संवाद करते नजर आए। राहत सामग्री लेते समय वह लोगों का हाल पूछते और उनकी परेशानियों को सुनते दिखाई दिए। बाढ़ से प्रभावित परिवारों के बीच मुख्यमंत्री की मौजूदगी में प्रशासनिक सख्ती के साथ मानवीय संवेदना का भी पहलू नजर आया। मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद का भरोसा दिया।
किसी बाढ़ पीड़ित को न हो कोई कमी
राहत किट वितरित करते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने तथा जरूरतमंदों तक समय से सहायता पहुंचाने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आपदा की घड़ी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन को पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत कार्य चलाने और प्रभावित परिवारों की जरूरतों का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए।
विकास के मंच से राहत और बचाव तक बदली प्राथमिकता
आठ जुलाई को जब मुख्यमंत्री चित्रकूट पहुंचे थे, तब मुख्य फोकस विकास परियोजनाओं पर था। दो महीने बाद मंदाकिनी की बाढ़ ने जिले के कई इलाकों के हालात बदल दिए हैं। ऐसे में सरकार की प्राथमिकता अब राहत और बचाव कार्य हो गई है। मुख्यमंत्री का खुद बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचना प्रशासन के लिए भी स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि आपदा के समय प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है। बाढ़ से परेशान परिवारों को राहत किट देने के साथ मुख्यमंत्री ने उन्हें हरसंभव सहायता का भरोसा भी दिलाया। दो महीने के अंतराल में चित्रकूट में विकास योजनाओं के मंच से लेकर बाढ़ प्रभावित परिवारों के बीच राहत और बचाव तक सरकार की प्राथमिकताओं की बदली तस्वीर दिखाई दी।
