पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री ने संगठन में अनदेखी और अफसरशाही पर उठाए सवाल, रहस्यमयी पोस्ट से भी बढ़ी सियासी हलचल; बोले- पार्टी रखना चाहती है या नहीं, फैसला नेतृत्व करे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ दलित नेता और मोहनलालगंज के पूर्व सांसद कौशल किशोर के बागी तेवरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। संगठन में कथित अनदेखी और प्रशासनिक कार्यशैली से नाराज कौशल किशोर ने अपनी ही पार्टी और मौजूदा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। पूर्व सांसद का कहना है कि उन्हें पार्टी के कार्यक्रमों और बैठकों में नहीं बुलाया जाता और उन्हें राजनीतिक तौर पर किनारे लगाने की कोशिश की जा रही है। उनके हालिया बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के बाद भाजपा के भीतर उनके भविष्य को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
‘मुझे कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता’
एक बातचीत के दौरान कौशल किशोर ने कहा कि उन्हें कार्यक्रमों में नहीं बुलाया जाता और उन्हें किनारे लगाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन की बैठकों, सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों तक में उन्हें सूचना या निमंत्रण नहीं दिया जा रहा। पूर्व सांसद ने यह भी दावा किया कि उनकी सुरक्षा वापस ले ली गई है। उन्होंने संकेत दिया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पार्टी के कुछ लोगों ने उनके खिलाफ काम किया था। कौशल किशोर ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह किसी महल से नहीं आए हैं, बल्कि संघर्ष करते हुए राजनीति में अपनी जगह बनाई है। उन्होंने कहा कि उन्होंने जीवन में 15 चुनाव लड़े और इनमें से 12 में हार का सामना किया, इसलिए उन्हें दरकिनार करने या डराने की कोशिशों से वह पीछे हटने वाले नहीं हैं।
‘गेंद अब नीचे आ रही है’ पोस्ट से बढ़ी हलचल
कौशल किशोर के बयानों के साथ उनकी सोशल मीडिया पोस्ट भी चर्चा में हैं। 31 अगस्त को की गई एक पोस्ट में उन्होंने संगठन और आंदोलन के मूल सिद्धांतों से भटकने को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने एक मित्र के हवाले से लिखा कि गेंद जितनी ऊपर जानी थी, उतनी ऊपर जा चुकी है और अब नीचे आ रही है। उन्होंने आगे लिखा कि नीचे आने की गति लगातार बढ़ती जाती है और गिरती हुई गेंद की रफ्तार को कोई कम नहीं कर सकता। कौशल किशोर की इस पोस्ट को राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने पोस्ट में किसी नेता या संगठन का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया।
थानों और तहसीलों में कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होने का आरोप
पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री ने राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा का जमीनी और कर्मठ कार्यकर्ता निराश और हताश है। उनका आरोप है कि बूथ अध्यक्ष और पार्टी के निष्ठावान पदाधिकारी जब जनता की समस्याएं लेकर थानों और तहसीलों में जाते हैं तो कई बार अधिकारी उनकी बात तक नहीं सुनते। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता अपनी समस्याएं लेकर नेताओं के पास पहुंच रहे हैं। कौशल किशोर ने सवाल उठाया कि यदि जनसमस्याओं को लेकर अधिकारियों के पास जाने वाले कार्यकर्ताओं की ही सुनवाई नहीं होगी तो सरकार और संगठन की नींव कैसे मजबूत होगी।
क्या पाला बदलेंगे कौशल किशोर?
कौशल किशोर के बागी तेवरों के बीच उनके किसी दूसरे राजनीतिक दल में जाने की अटकलें भी लगाई जा रही हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि क्या वह भाजपा से अलग होकर कांग्रेस या किसी अन्य विपक्षी दल का रुख कर सकते हैं। हालांकि, कौशल किशोर ने फिलहाल भाजपा छोड़ने का कोई स्पष्ट ऐलान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि वह अभी पार्टी की मूल विचारधारा के साथ हैं, लेकिन जनहित विरोधी नीतियों और कार्यकर्ताओं के अपमान पर चुप नहीं बैठेंगे।
‘पार्टी रखना चाहती है या नहीं, फैसला नेतृत्व करे’
कौशल किशोर ने अपने भविष्य को लेकर कहा कि फिलहाल वह पार्टी की मूल विचारधारा के साथ हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी उन्हें रखना चाहती है या नहीं, यह फैसला नेतृत्व को करना है उन्होंने यह भी कहा कि जिस दिन पार्टी कहेगी कि उनकी जरूरत नहीं है, उस दिन वह अपने भविष्य का फैसला खुद करेंगे। इस बयान के बाद कौशल किशोर और भाजपा नेतृत्व के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं। सुरक्षा वापस लिए जाने, संगठनात्मक कार्यक्रमों से कथित दूरी और कार्यकर्ताओं की समस्याओं को लेकर उनके लगातार मुखर होने से उत्तर प्रदेश की सियासत में नए समीकरणों की अटकलें लगाई जा रही हैं।
