बरेली : अग्निवीर भर्ती में मेडिकल जांच में फेल होने वाले अभ्यर्थियों को दोबारा मेडिकल में पास कराने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक जालसाज को बरेली पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार किया है। आरोपी खुद को सेना का सेवानिवृत्त हवलदार बताकर अभ्यर्थियों पर प्रभाव जमाता था और उन्हें भरोसा दिलाता था कि सेना के अधिकारियों से उसकी अच्छी पहुंच है। इसके बाद मेडिकल में पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से रकम वसूली जाती थी। मामले का खुलासा सैन्य खुफिया इकाई से मिली सूचना के बाद हुआ। कैंट थाना पुलिस ने कार्रवाई कर आरोपी को आर्मी अस्पताल के पास से गिरफ्तार किया। पकड़े गए आरोपी की पहचान राजेश तिवारी निवासी सैरपुर, लखनऊ के रूप में हुई है। इस मामले में एसपी सिटी मानुष पारिक ने मीडिया के सामने खुलासा किया है।
फर्जी दस्तावेज और मुहर से बनाता था सेना में पहुंच का भरोसा
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने एक अग्निवीर अभ्यर्थी को मेडिकल में पास कराने का भरोसा देकर उससे 40 हजार रुपये लिए थे। जांच के दौरान उसके मोबाइल और अन्य सामान से ठगी के महत्वपूर्ण साक्ष्य भी मिले हैं। पुलिस को आरोपी के पास से एक रजिस्टर, मोबाइल फोन, फर्जी मुहर और सेना के कैंटीन कार्ड की छायाप्रति समेत कई दस्तावेज मिले हैं। बरामद रजिस्टर में कई अग्निवीर अभ्यर्थियों के नाम, रोल नंबर और मेडिकल में फेल होने के कारण दर्ज मिले। इसके अलावा 108 महार रेजिमेंट से जुड़े तीन फर्जी कॉल-अप लेटर की छायाप्रतियां भी बरामद होने की बात सामने आई है। आरोपी इन्हीं दस्तावेजों और मुहरों का इस्तेमाल कर अभ्यर्थियों को यह विश्वास दिलाता था कि वह सेना के अधिकारियों से संपर्क कर उन्हें मेडिकल में दोबारा पास करा सकता है।
मेडिकल में फेल अभ्यर्थियों को बनाता था निशाना
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जो अग्निवीर भर्ती की मेडिकल प्रक्रिया में किसी वजह से फेल हो जाते थे। इसके बाद वह उनसे संपर्क कर उन्हें मेडिकल में दोबारा पास कराने का लालच देता था। आरोपी कथित तौर पर फर्जी कॉल-अप और रेफरल लेटर दिखाकर अभ्यर्थियों का विश्वास जीतता था। इसके बाद उनसे रकम तय की जाती थी।पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल में उसका एक साथी गजेंद्र सिंह भी शामिल था।
व्हाट्सऐप चैट से खुला नेटवर्क का राज
जांच के दौरान आरोपी के मोबाइल फोन से गजेंद्र सिंह के साथ हुई व्हाट्सऐप चैट भी मिली है। चैट में अभ्यर्थियों के रेफरल फॉर्म और रुपये के लेनदेन से जुड़ी बातचीत सामने आई है।पुलिस के मुताबिक, अभ्यर्थी से जुड़ी पूरी जानकारी व्हाट्सऐप के जरिए गजेंद्र सिंह को भेजी जाती थी। इसके बाद राजेश रकम हासिल करता था। बताया जा रहा है कि वह अपना हिस्सा रखने के बाद बाकी रकम गजेंद्र सिंह के बताए खाते में भेज देता था।
21 अगस्त को 40 हजार रुपये लेने का मिला सबूत
पुलिस की जांच में एक महत्वपूर्ण लेनदेन भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार, 21 अगस्त को अंकित सिंह चौहान नाम के एक अभ्यर्थी से राजेश तिवारी ने यूपीआई के जरिए 40 हजार रुपये लिए थे। खास बात यह है कि इस रकम का उल्लेख आरोपी के पास मिले रजिस्टर में भी दर्ज मिला। मोबाइल फोन में मिले डिजिटल साक्ष्यों और रजिस्टर में दर्ज जानकारी को पुलिस मामले की जांच में अहम कड़ी मान रही है।
पहले अकादमी चलाता था आरोपी
पूछताछ में आरोपी राजेश तिवारी ने पुलिस को बताया कि वह पहले जबलपुर में एक अकादमी चलाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि अग्निवीर भर्ती व्यवस्था से जुड़ी अभ्यर्थियों की जानकारी उसे कहां से मिलती थी और इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं। पुलिस आरोपी के साथी गजेंद्र सिंह की तलाश के साथ-साथ उन अभ्यर्थियों की भी जानकारी जुटा रही है। जिन्हें इस गिरोह ने कथित तौर पर अपना शिकार बनाया।
पुलिस की अपील-दलालों के झांसे में न आएं अभ्यर्थी
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी अभ्यर्थी को मेडिकल में पास कराने के नाम पर पैसे मांगने वाले किसी भी व्यक्ति के झांसे में न आएं। सेना में भर्ती की प्रक्रिया से जुड़े किसी भी व्यक्ति या दस्तावेज की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तत्काल पुलिस को सूचना देने की अपील की गई है। कैंट थाना पुलिस, आर्मी इंटेलीजेंस, और एसओजी की इस कार्रवाई के संबंध में एसपी सिटी मानुष पारीक ने भी जानकारी दी है। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपी के नेटवर्क, उसके साथी और संभावित पीड़ित अभ्यर्थियों के बारे में आगे की जानकारी जुटा रही है।
