शिकायतकर्ता
शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने क्लीनिक किया था सील, 15 अगस्त को हाफिजगंज थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
बरेली : मरीज डॉक्टर पर भरोसा कर अपनी जिंदगी उसके हाथों में सौंपता है, लेकिन जब किसी चिकित्सक की योग्यता और इलाज के तरीके पर सवाल उठें तो मामला गंभीर हो जाता है।हाफिजगंज क्षेत्र में ऐसा ही एक मामला सामने आया है। बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के क्लीनिक संचालित करने और मरीजों का उपचार करने के आरोप में डॉ. अशोक विश्वास के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।यह मामला हाफिजगंज निवासी प्रद्युम्न कुमार की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि डॉ. अशोक विश्वास कथित तौर पर बिना वैध चिकित्सकीय डिग्री के क्लीनिक चला रहे थे। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि वहां मरीजों को दवाइयां और इंजेक्शन दिए जाते थे तथा गंभीर बीमारियों के इलाज के नाम पर उनसे धन लिया जाता था।
IGRS शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने की जांच

शिकायत IGRS के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची। बरेली मंडल के अपर निदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कथित क्लीनिक का निरीक्षण किया। विभागीय कार्रवाई के तहत क्लीनिक को सील कर दिया गया। क्लीनिक सील होने के बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर घर से भी चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोबारा निरीक्षण किया। हालांकि, विभागीय आख्या के मुताबिक घर पर क्लीनिक संचालित किए जाने का कोई साक्ष्य टीम को नहीं मिला।
हाफिजगंज थाने में दर्ज हुआ मुकदमा
इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। FIR दर्ज कराने की संस्तुति के बाद 15 अगस्त 2026 को हाफिजगंज थाने में FIR संख्या 0462 दर्ज की गई। मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4),इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट, 1956 की धारा 15(3) और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 34 के तहत कार्रवाई की गई है। मामले की जांच उपनिरीक्षक मदन गोपाल को सौंपी गई है।
अब पुलिस जांच से सामने आएगी हकीकत
FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच में डॉक्टर की शैक्षिक एवं चिकित्सकीय योग्यता, मेडिकल पंजीकरण, क्लीनिक संचालन से जुड़े दस्तावेज, मरीजों के उपचार और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी।फिलहाल आरोपी डॉ. अशोक विश्वास का पक्ष सामने नहीं आया है। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अब पुलिस जांच तय करेगी कि बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के इलाज करने के आरोपों में कितनी सच्चाई है और पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर क्या है।
